उद्योग एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आईएमटी (इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप) के लिए नई नीति लागू की है। इसके तहत आईएमटी के लिए जमीन देने वाले किसानों को विकसित होने के बाद उनकी दी गई जमीन का आधा हिस्सा वापस दिया जाएगा। साथ ही, जब तक आईएमटी पूरी तरह विकसित नहीं हो जाती, तब तक किसानों को फसल नुकसान की भरपाई के रूप में चार वर्षों तक प्रतिवर्ष प्रति एकड़ एक लाख रुपए की राशि दी जाएगी। राव नरबीर सिंह रविवार को रेवाड़ी के गांव पाल्हावास में आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने ‘मेक इन हरियाणा’ नीति लागू की है, जिसमें औद्योगिक विकास के साथ-साथ किसानों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए औद्योगिक विस्तार आवश्यक है। एक लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य मंत्री ने बताया कि ‘मेक इन हरियाणा’ नीति का शुभारंभ एक जून को गुरुग्राम में किया गया था। इस नीति के तहत प्रदेश में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही हरियाणा में 10 नई आईएमटी विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे बड़े स्तर पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी। ई-भूमि पोर्टल पर कर सकते हैं आवेदन कार्यक्रम में मौजूद चीफ कोऑर्डिनेटर इंडस्ट्रीज सुनील शर्मा ने किसानों से कोसली क्षेत्र में प्रस्तावित आईएमटी के लिए भूमि उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं या लैंड पूलिंग नीति का विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने भूमि खरीद प्रक्रिया और उससे जुड़े लाभों की भी जानकारी दी। रजिस्ट्री के दिन ही मिलेगा भुगतान सुनील शर्मा ने बताया कि जिस दिन किसान की जमीन की रजिस्ट्री होगी, उसी दिन उसके बैंक खाते में एकमुश्त भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईएमटी बनने से क्षेत्र में लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे और दक्षिण हरियाणा के साथ-साथ पूरे प्रदेश की आर्थिक प्रगति को गति मिलेगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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IMT में जमीन देने वाले किसानों को मिलेगा आधा हिस्सा:रेवाड़ी में राव नरबीर बोले- 4 साल प्रति एकड़ के 1 लाख मिलेंगे
