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Yamunanagar Kalalesar Leopard Sick | Dog Disease Alert


तेंदुए में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के लक्षण मिले।

हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित कलेसर जंगल में सेंचुरी एरिया में एक तेंदुए (लैपर्ड) ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम के दौरान उसमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के गंभीर लक्षण मिले हैं। यह बीमारी अकसर कुत्तों से फैलती है। ग्रामीणों ने इस

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वन्य प्राणी विभाग की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि दो दिन पहले ही एक और लैपर्ड भी आबादी क्षेत्र में देखा गया। जो काफी सुस्त व बीमार नजर आ रहा था। रामपुर खादर के किसान ने उसकी वीडियो बनाई थी। करीब 25 हजार एकड़ में फैले कलेसर नेशनल पार्क और सेंचुरी एरिया में 50 तेंदुए होने का अनुमान है। सरकार ने 3 साल पहले विधानसभा में यह संख्या 23 बताई थी।

पोस्टमॉर्टम के बाद बनसंतूर हाथी पुनर्वास केंद्र के परिसर में तेंदुए के शरीर को जलाने के बाद अवशेष जमीन में दफना दिए गए।

अब सिलसिलेवार जानिए क्या है पूरा मामला

ग्रामीणों ने ही विभाग को सूचना दी

कलेसर जंगल के सेंचुरी एरिया के पास गांव शहजाद वाला है। वहीं के कुछ ग्रामीणों ने जंगल के कोने में तेंदुए को तड़पता देखा। उसके बाद वन्य प्राणी विभाग को सूचना दी। कई दिनों से विभाग का गश्ती दल इस एरिया में नहीं आया था। अनुमान है कि तेंदुआ यहां कई दिन से तड़प रहा था।

तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया

गंभीर हालत में मिले तेंदुए को इलाज के लिए डॉक्टर के पास ले जाया गया। इसी दौरान जानवर की मौत हो गई। तीन डॉक्टरों डॉ. राहुल छछरौली, डॉ. विक्रांत साढौरा व डॉ. प्रशांत तिवारी ने पोस्टमॉर्टम किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में तेंदुए का लीवर, हार्ट बुरी तरह प्रभावित मिले। आंतों में ब्लीडिंग और सांस की नली में भी कई तरह के विकार मिले।

गंभीर वायरस के लक्षण मिले

पैनल के डॉक्टरों का कहना है कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के लक्षण हैं। फिर भी इसकी कन्फर्मेशन के लिए सैंपल लेकर जांच के लिए हिसार लैब भेजे जा रहे हैं। ताकि बीमारी की पुष्टि हो सके और अन्य तेंदुओं व बाकी जीवों को समय रहते इसके दुष्प्रभाव का पता लगाया जा सके।

आमतौर पर बीमार जानवर आइसोलेट हो जाता है

डॉ. सतबीर नैन ने बताया कि आमतौर पर अगर कोई लैपर्ड या जानवर इस तरह की बीमारी से ग्रसित हो जाता है तो वह स्वयं आइसोलेट हो जाता है। अलग-थलग रहता है। ऐसे में इस बीमारी संक्रमण समूह में फैलने का खतरा कम रहता है।

8 से 10 महीने का था नर तेंदुआ

पशुपालन विभाग के डॉ. सतीश धनिया ने बताया कि नियमों के अनुसार मृत लैपर्ड का संस्कार करके उसके अवशेष को जमीन में दबाया गया। मौत के जो भी कारण हैं, उसकी जांच के लिए बिसरा हिसार लैब में भेजा जा रहा है। मृत जानवर को हाथी पुनर्वास केंद्र परिसर में जमीन में दफनाया गया है। तेंदुआ नर था और उसकी अनुमानित उम्र 8 से 10 महीने के आसपास है।

रामपुर व खदरी में तेंदुआ आबादी में पहुंचा

कलेसर नेशनल पार्क से करीब 30 किलोमीटर दूर गांव रामपुर में बुधवार (1 जुलाई) रात करीब 8 बजे किसान ब्रह्मपाल के पापुलर के खेत में लैपर्ड दिखा। उसके बाद ट्यूबवेल के कमरे की छत पर दिखा। ग्रामीणों के मुताबिक लैपर्ड उम्र दराज या बीमार था। क्योंकि उसकी चाल सुस्त थी। वह फुर्तीले जानवरों का शिकार नहीं कर पा रहा होगा, इसी वजह से आबादी क्षेत्र में आया।

रामपुर खादर गांव में ट्यूबवेल के कमरे की छत पर शिकार के साथ बैठा तेंदुआ।

3 राज्यों के जंगलों पर खतरा

कलेसर नेशनल पार्क की सीमा हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड व यूपी से लगती है। यहां तीन नेशनल पार्क आपस में जुड़े हुए हैं। कलेसर नेशनल के साथ हिमाचल का कर्नल शेर जंग (सिंबलबाड़ा) नेशनल पार्क और उत्तराखंड का राजाजी नेशनल पार्क भी जुड़ा है। बहराल के पास एक कॉरिडोर भी बना है। जहां से तीनों नेशनल पार्क के जानवर मूवमेंट करते हैं।

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यमुनानगर जिले में कलेसर नेशनल पार्क से जंगली हाथी सड़क पर पहुंच गया। बुधवार देर शाम हाथी जगाधरी-पांवटा नेशनल हाईवे पर करीब 20 मिनट खड़ा रहा। वहीं दूसरी ओर खदरी क्षेत्र के रामपुर खादर गांव में एक तेंदुआ शिकार करने के बाद ट्यूबवेल के कमरे की छत पर चढ़ गया, जिसका किसानों ने वीडियो बना लिया। पढ़ें पूरी खबर…



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