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उचाना MLA बोले- राजनीतिक परिवार ने क्षेत्र से अन्याय किया:अत्री ने ₹16.51 लाख के अनुदान की घोषणा की; भाजपा को अनुशासित बताया




जींद जिले के उचाना में ब्राह्मण धर्मशाला में भगवान परशुराम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पहुंचने पर आयोजकों ने उनका फूलों से स्वागत किया। विधायक अत्री ने अपनी पत्नी सुषमा अत्री के साथ हवन में पूर्णाहुति दी। भाजपा विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान परशुराम ने सिखाया कि जब अन्याय बढ़ता है, तो चुप रहना सबसे बड़ा अपराध होता है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम केवल शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय, अनुशासन, ज्ञान और सामाजिक संतुलन के प्रतीक थे। उचाना हलके में राजनीतिक अन्याय का जिक्र विधायक अत्री ने कहा कि उचाना हलके के साथ वर्षों से राजनीतिक अन्याय होता आया है। उन्होंने कहा कि हलके के मतदाताओं ने इस अन्याय को देखते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया और विधानसभा भेजा। उन्होंने कहा कि पहले के नेता लोगों को इंतजार करवाकर मिलते थे ताकि भीड़ अधिक दिखे, जबकि वह एक भी व्यक्ति के आने पर उससे तुरंत मिलते हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव पर बोले विधायक अत्री पत्रकार वार्ता में विधायक अत्री ने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह चुनाव दिखाएगा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण का जो विरोध किया था, महिला मतदाताओं ने वोट की चोट से उसका जवाब दिया है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और पश्चिम बंगाल की जनता विकास को चुनेगी, जंगलराज को समाप्त करेगी। कुलदीप बिश्नोई के बयान पर प्रतिक्रिया कुलदीप बिश्नोई के बयान पर टिप्पणी करते हुए विधायक अत्री ने कहा कि भाजपा विश्व की सबसे बड़ी और संतुलित पार्टी है। उन्होंने सभी से संयम और मर्यादा में रहकर बात करने की अपील की। धर्मशाला और समिति को दी आर्थिक सहायता विधायक अत्री ने इस अवसर पर ब्राह्मण धर्मशाला के लिए विधायक फंड से 11 लाख रुपये और कार्यक्रम आयोजक कमेटी को अपने निजी कोष से 5 लाख 51 हजार रुपये देने की घोषणा की। शिक्षा और समान अवसर पर जोर विधायक ने कहा कि शिक्षा से बड़ा कोई साधन नहीं है। भाजपा सरकार ने बिना पर्ची, बिना खर्ची की नीति से ऐतिहासिक कार्य किए हैं। आज गरीब परिवारों के युवा बड़े-बड़े पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन हमें न्याय और परिश्रम का संदेश देता है।



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