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झज्जर के मुनीमपुर गांव में कुएं में जहरीली गैस की चपेट में आने से चार युवकों की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। हादसे के दौरान एंबुलेंस की व्यवस्था और राहत-बचाव कार्य में हुई कथित लापरवाही की जांच अब आगे बढ़ रही है। प्रशासन की ओर से एंबुलेंस चालकों और ईएमटी से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए गए हैं। साथ ही हादसे के दिन मौके पर भेजी गई एंबुलेंस की जीपीएस लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज भी जांच के लिए जुटाई गई है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। मुनीमपुर गांव में 19 जुलाई की रात कुएं में गिरे बछड़े को बचाने के प्रयास में चार युवक कुएं के अंदर उतर गए थे। कुएं में जहरीली गैस बनी होने के कारण चारों युवक सांस नहीं ले पाए और बाहर नहीं निकल सके। सूचना मिलने के बाद पुलिस, प्रशासन, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन हादसे में चारों युवकों की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने राहत एवं बचाव कार्य में कथित लापरवाही को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। ग्रामीणों का आरोप था कि मौके पर पहुंची एंबुलेंस में ऑक्सीजन की पर्याप्त सुविधा नहीं थी और न ही ईएमटी मौजूद था। ग्रामीणों ने कहा था कि यदि समय रहते उचित चिकित्सा सुविधा और ऑक्सीजन उपलब्ध हो जाती तो युवकों की जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया था कि कुएं से निकाले गए चौथे युवक को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद उसे पुलिस की पीसीआर के जरिए नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन ने अब एंबुलेंस व्यवस्था की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। फ्लीट मैनेजर और कंट्रोल रूम ऑपरेटर की भूमिका भी जांच के दायरे में हादसे के बाद मौके पर एंबुलेंस भेजने की जिम्मेदारी फ्लीट मैनेजर और कंट्रोल रूम ऑपरेटर की होती है। ऐसे में जांच के दौरान उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आरोप है कि गंभीर स्थिति की जानकारी होने के बावजूद मौके पर ऐसी एंबुलेंस भेजी गई, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा को घर छोड़ने के लिए किया जाता है। बताया गया है कि नियमों के अनुसार किलकारी एंबुलेंस का इस्तेमाल केवल दिन के समय किया जाता है। अब प्रशासन यह जांच कर रहा है कि हादसे की सूचना मिलने के बाद कंट्रोल रूम से किस समय कौन-सी एंबुलेंस को रवाना किया गया, वह कितने समय में मौके पर पहुंची और उसमें ऑक्सीजन व ईएमटी की व्यवस्था थी या नहीं। इसके लिए एंबुलेंस की जीपीएस लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। बयान दर्ज, मंगलवार को फिर होगी सुनवाई बादली एसडीएम विशाल कुमार ने बताया कि मामले की सुनवाई के लिए एंबुलेंस चालकों और ईएमटी को बुलाया गया था और उनके बयान दर्ज किए गए हैं। मामले में अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। जांच में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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