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हरियाणा में मानसून की कमजोर बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को गोहाना में भारतीय किसान यूनियन (चढूनी ग्रुप) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान सिंचाई विभाग कार्यालय पहुंचे। प्रदेश के कई इलाकों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से धान, बाजरा, कपास और अन्य खरीफ फसलों पर संकट गहराता जा रहा है। खेतों में नमी खत्म होने लगी है और सिंचाई के लिए नहरों में भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने विभाग के एक्सईएन (कार्यकारी अभियंता) को ज्ञापन सौंपकर हरियाणा को सूखाग्रस्त घोषित करने, बंद पड़ी नहरों में तुरंत पानी छोड़ने और किसानों को राहत देने की मांग की। किसानों ने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार और प्रशासन के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। बारिश की कमी से फसलों पर मंडराया संकट किसानों ने बताया कि इस बार प्रदेश में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। लगातार सूखे जैसे हालात के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं। उनका कहना है कि कई क्षेत्रों में करीब 50 प्रतिशत फसल प्रभावित हो चुकी है। यदि समय रहते सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो नुकसान और अधिक बढ़ सकता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।
हरियाणा को सूखाग्रस्त घोषित करने की उठाई मांग भारतीय किसान यूनियन (चढूनी ग्रुप) के पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की कि प्रदेश में मौजूदा हालात को देखते हुए हरियाणा को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। उनका कहना है कि सूखा घोषित होने से किसानों को सरकारी राहत, मुआवजा और अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे नुकसान की कुछ भरपाई हो सकेगी। बंद नहरों में तुरंत छोड़ा जाए पानी
किसानों ने मांग की कि नाला ब्रांच, रोहतक ब्रांच और बुटाना स्टेट माइनर सहित जिन नहरों में पानी बंद है, उनमें तुरंत पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाए। किसानों का कहना है कि इस समय सिंचाई के लिए नहरों का पानी ही एकमात्र सहारा है और यदि जल्द पानी नहीं मिला तो फसलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। मांगें नहीं मानी गईं तो होगा आंदोलन किसानों ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है और अब उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा। सिंचाई विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
किसानों ने अपना ज्ञापन सिंचाई विभाग के एक्सईएन को सौंप दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग और राज्य सरकार किसानों की मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं और फसलों को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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