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पंजाब के मानसा जिला परिषद में एक आईएएस (IAS) अधिकारी के जाली (फर्जी) हस्ताक्षर कर लाखों रुपये का गबन करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिला परिषद के चेयरमैन चुषपिंदरबीर सिंह चहल ने बताया कि संस्थान के लेखाकार (Accountant) राजेश कुमार और क्लर्क रामपाल ने धोखाधड़ी करते हुए जिला परिषद के खाते से 25 लाख रुपये निकालकर अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर लिए। इसके बाद तस्करों जैसे हौसले दिखाते हुए उन्होंने 21 लाख रुपये और निकालने के लिए बैंक में नया चेक जमा करा दिया। जब 21 लाख रुपये का नया चेक बैंक पहुंचा, तो बैंक अधिकारियों को चेक पर किए गए हस्ताक्षरों पर संदेह हुआ। सतर्कता बरतते हुए बैंक अधिकारियों ने संबंधित आईएएस अधिकारी से सीधा संपर्क किया। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उनका तीन महीने पहले ही स्थानांतरण (तबादला) हो चुका है और उन्होंने ऐसा कोई चेक जारी नहीं किया है। बैंक की इस तत्परता से पूरे गबन का भांडाफोड़ हो गया। आपसी खातों में बांटी गई थी गबन की रकम मामले की प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों द्वारा पहले निकाले गए 25 लाख रुपये में से एक कर्मचारी ने 11 लाख रुपये और दूसरे कर्मचारी ने 10 लाख रुपये अपने-अपने बैंक खातों में जमा करवा लिए थे। इसके अलावा, शेष 4 लाख रुपये की राशि भी अलग से निकाली गई थी। दोनों कर्मचारी तत्काल प्रभाव से निलंबित, जांच जारी चेयरमैन चुषपिंदरबीर सिंह चहल ने कहा कि पंजाब सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। उन्होंने कार्यभार संभालते ही कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी थी कि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनिमियतता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फर्जीवाड़ा उजागर होने के तुरंत बाद दोनों दोषी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और मामले की गहराई से विभागीय व कानूनी जांच शुरू कर दी गई है।
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