यमुनानगर के निजी स्कूलों की फीस, किताबों और नियमों को लेकर अभिभावकों का विरोध अब सड़क पर उतर आया है। रविवार को शहर के कैंप मुख्य बाजार से सरकारी स्कूल कैंप तक अभिभावकों और समाजसेवियों ने “एक देश-एक किताब-एक समान फीस” की मांग को लेकर शांतिपूर्ण पदयात्रा निकाली। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निजी स्कूलों पर सरकारी नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग उठाई। परिजनों का आरोप हो कि कई बार शिकायतों के बाद कोई समाधान नहीं हुआ है। 35 निजी स्कूल नियमों का उल्लंघन करते पाए गए पदयात्रा के दौरान अभिभावकों ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी की जांच में 35 निजी स्कूलों को सरकारी नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया था, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद भी संबंधित स्कूलों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अभिभावक अंकुश बक्शी ने कहा कि इस मामले को लेकर जिला प्रशासन, जिला शिक्षा अधिकारी, मुख्यमंत्री समाधान शिविर, सीएम विंडो और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार शिकायतें और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद कार्रवाई न होना सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी स्कूलों के खिलाफ निष्पक्ष और जल्द कार्रवाई की जाए, ताकि अभिभावकों को न्याय मिल सके। नारे लगाकर आवाज की बुलंद पदयात्रा के दौरान अभिभावकों ने एक देश-एक किताब-एक समान फीस, शिक्षा नहीं, व्यापार बंद करो और बच्चों का भविष्य बचाओ जैसे नारे लगाकर अपनी मांगों को बुलंद किया। प्रदर्शन में संजीव नंदा, संजय राघव, नीरज कुमार समेत कई अभिभावक शामिल रहे।
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यमुनानगर में निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों का प्रदर्शन:एक देश-एक किताब-एक समान फीस की मांग, बोले-नियमों का उल्लंघन करने वालों पर हो कार्रवाई
