![]()
नीट यूजी 2026 के री-एग्जाम में ऑल इंडिया संयुक्त टॉपर बने फरीदाबाद के पंशुल बंसल की सफलता जितनी शानदार है, उसके पीछे का संघर्ष उतना ही भावुक है। पंशुल ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि पेपर लीक होने के कारण नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है, तो उन्हें गहरा सदमा लगा था। उन्होंने कहा, “मैं उस समय बहुत रोया था। दो साल की मेहनत एक पल में खत्म होती नजर आ रही थी। ऐसा लग रहा था कि सब कुछ बिखर गया है।” हालांकि परिवार ने उन्हें संभाला और समझाया कि जो हो चुका है, उसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन दोबारा मेहनत करके नई शुरुआत जरूर की जा सकती है। इसके बाद उन्होंने फिर से पूरी लगन के साथ तैयारी शुरू की और री-एग्जाम में 720 में से 715 अंक हासिल कर देश के संयुक्त टॉपर बने। रोज सिर्फ 7 घंटे पढ़ाई, बाकी समय खुद को रखते थे फ्रेश पंशुल ने बताया कि उन्होंने कभी 15-16 घंटे पढ़ाई करने का दबाव नहीं बनाया। वह रोजाना करीब 7 घंटे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई करते थे। बाकी समय दोस्तों के साथ बिताते थे और पियानो बजाना उनका पसंदीदा शौक था। उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। पांचवीं कक्षा में तय कर लिया था डॉक्टर बनने का सपना पंशुल ने बताया कि उन्होंने पांचवीं कक्षा में ही डॉक्टर बनने का फैसला कर लिया था। उन्हें बचपन से ही फिजिक्स और केमिस्ट्री बेहद पसंद थीं और इसी रुचि ने उन्हें मेडिकल क्षेत्र चुनने के लिए प्रेरित किया। 715 अंक, लेकिन बायोलॉजी में कम अंक होने से दूसरे स्थान पर री-एग्जाम में पंशुल ने 720 में से 715 अंक हासिल किए। पंजाब के आर्यन गुप्ता ने भी 715 अंक प्राप्त किए, लेकिन बायोलॉजी में अधिक अंक होने के कारण उन्हें पहली रैंक मिली, जबकि पंशुल संयुक्त टॉपर होने के बावजूद मेरिट क्रम में दूसरे स्थान पर रहे। पिता बनाना चाहते थे इंजीनियर, बेटे ने चुना मेडिकल पंशुल के पिता संजीव कुमार बंसल, जो एक व्यवसायी हैं, चाहते थे कि बेटा इंजीनियर बने। लेकिन जब पंशुल ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, तो परिवार ने उनकी पसंद का सम्मान किया और मेडिकल की तैयारी में पूरा सहयोग दिया। फरीदाबाद से रोज दिल्ली जाकर की पढ़ाई पंशुल ने दिल्ली के कैलाश कॉलोनी स्थित समर फील्ड स्कूल से 12वीं की पढ़ाई की। इसी दौरान उन्होंने दिल्ली से ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा की कोचिंग भी ली। वह रोज फरीदाबाद से दिल्ली आना-जाना करते थे। उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया। जब कभी टेस्ट में कम अंक आते, तो डांटने के बजाय उनका हौसला बढ़ाया जाता था। सोशल मीडिया और दोस्तों से नहीं बनाई दूरी पंशुल का कहना है कि उन्होंने तैयारी के दौरान खुद को दुनिया से अलग नहीं किया। वह खाली समय में यूट्यूब, एनिमेशन वीडियो देखते थे और हर तीन महीने में टेस्ट के बाद दोस्तों के साथ घूमने भी जाते थे। कभी-कभी दोस्तों के साथ पार्टी भी करते थे। उनका मानना है कि लगातार पढ़ाई के बीच मानसिक ताजगी बनाए रखना जरूरी है। पिता की सलाह: बच्चों की तुलना कभी न करें पंशुल के पिता संजीव कुमार बंसल ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कम अंक आना असफलता नहीं है। हर बच्चे की अपनी प्रतिभा होती है। माता-पिता का काम उस प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ाना है, न कि केवल अंकों के आधार पर बच्चे का मूल्यांकन करना।
Source link
नीट टॉपर पंशुल बोले, पेपर रद्द होने पर खूब रोया:परिवार के हौसले से री-एग्जाम में टॉपर बने,720 में से 715 अंक लेकर रचा इतिहास







