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फरीदाबाद में शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली। बारिश के बाद जलनिकासी व्यवस्था को लेकर कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में करीब 120 एमएम बारिश हुई, जिसके बाद जलभराव की चुनौती से निपटने के लिए नगर निगम समेत सभी संबंधित विभागों की टीमें लगातार काम करती रहीं। विपुल गोयल ने कहा कि तेज बारिश के बावजूद शहर के अधिकांश इलाकों से समय रहते पानी की निकासी कर दी गई। उन्होंने बताया कि एक-दो स्थानों को छोड़कर ज्यादातर जगहों पर स्थिति को जल्द नियंत्रित कर लिया गया। कैबिनेट मंत्री बोले- बारिश में भी जुटे रहे कर्मचारी मंत्री के मुताबिक, पिछले करीब छह महीने से संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बारिश के दौरान जलभराव से निपटने की तैयारियों में जुटे हुए थे। इसी तैयारी का परिणाम है कि भारी बारिश के बाद भी अधिकांश इलाकों में पानी ज्यादा समय तक जमा नहीं रहा। मंत्री ने दावा किया कि फरीदाबाद में करीब 80 से 90 प्रतिशत तक जलनिकासी व्यवस्था पर काम पूरा हो चुका है। कुछ स्थानों पर अभी भी कमियां मौजूद हैं, जिन्हें जल्द दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि बारिश के दौरान जिन स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आती है, वहां स्थायी समाधान किया जाए। विपुल गोयल ने कहा कि बारिश के दौरान कुछ समय के लिए सड़कों पर पानी जमा होना सामान्य बात है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह बाथरूम में शॉवर चलने के दौरान कुछ समय के लिए पानी जमा रहता है, उसी तरह तेज बारिश के दौरान सड़कों पर भी पानी दिखाई दे सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बारिश रुकने के बाद पानी की निकासी कितनी तेजी से होती है। जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने काम जारी : विपुल मंत्री ने जनता से यह भी अपील की कि जहां प्रशासन और संबंधित विभाग अच्छा काम कर रहे हैं, वहां उनकी सराहना भी की जानी चाहिए। उन्होंने बारिश के दौरान पानी में बैठकर या खड़े होकर जलभराव को दिखाने की कोशिश करने वाले लोगों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। जो 10 से 20 प्रतिशत काम अभी बाकी है, उसे भी जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आने वाले समय में भारी बारिश के दौरान लोगों को जलभराव की परेशानी का कम से कम सामना करना पड़े।
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