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पानीपत के चीता की अनोखी कांवड़:365 लीटर गंगाजल बुग्गी में लेकर पहुंचे; गांव के बुजुर्गों को करवाएंगे स्नान




पानीपत के सतनाम उर्फ चीता हरिद्वार से अपनी विशेष बुग्गी में 365 लीटर पवित्र गंगाजल लेकर पानीपत पहुंचे हैं। उनकी यह भक्ति और अनोखी कांवड़ यात्रा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। सतनाम चीता केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव के कल्याण के लिए यह कठिन यात्रा तय करते हैं। इस 365 लीटर गंगाजल से सतनाम अपने गांव के हर एक मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और पूरे गांव की परिक्रमा लगाते हैं। इस जल का एक बड़ा हिस्सा गांव के उन बुजुर्ग पुरुषों, माताओं और बहनों के लिए होता है, जो किसी कारणवश हरिद्वार जाने में असमर्थ हैं। सतनाम उन्हें इस पवित्र गंगाजल से स्नान कराते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।
365 लीटर गंगाजल का खास लॉजिक
एक बार में खा जाते हैं 36 केले यह कांवड़ यात्रा जितनी आध्यात्मिक है, उतनी ही शारीरिक क्षमता की परीक्षा भी है। सतनाम जिस बुग्गी को खींचकर लाते हैं, उसका खुद का वजन 480 किलो है। 365 लीटर गंगाजल और अन्य सामग्री मिलाकर इसका कुल वजन लगभग 900 किलोग्राम (9 क्विंटल) बैठता है। सतनाम अपने क्षेत्र में अपनी विशाल खुराक के लिए जाने जाते हैं। वे एक बार में 36 केले खा जाते हैं और आसानी से 1 से 2 किलो देसी घी पी जाते हैं। कांवड़ियों के साथ दौड़ प्रतियोगिता में जीते अपनी फिटनेस और रेस कॉम्पिटिशन के लिए मशहूर सतनाम चीता ने कांवड़ यात्रा के दौरान अपनी काबिलियत का लोहा भी मनवाया है। एक बार पैदल कांवड़ यात्रा के दौरान उनकी अन्य कांवड़ियों के साथ दौड़ प्रतियोगिता (रेस कॉम्पिटिशन) हो गई थी, जिसमें सतनाम ने सभी को पछाड़कर पहला स्थान हासिल किया और इनाम जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया था।



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