Related Posts

करनाल गेंहू घोटाले में एक और एफआईआर दर्ज:तत्कालीन कस्टोडियन अशोक शर्मा को ही ठहराया गया जिम्मेवार, 4.49 करोड़ का किया गबन




कुंजपुरा स्थित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सरकारी गोदाम में गेहूं गबन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। ताजा जांच में 9951 गेहूं के बैग गायब पाए गए हैं, जिनकी कीमत करीब 2.72 करोड़ रुपये आंकी गई है। विभागीय जांच में तत्कालीन कस्टोडियन अशोक शर्मा को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कुंजपुरा थाने में एक और एफआईआर दर्ज करवाई गई है। इससे पहले भी हजारों बैग कम मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। हर जांच में बढ़ता गया घोटाले का दायरा
कुंजपुरा गोदाम में गेहूं स्टॉक की जांच कई चरणों में हुई और हर बार गड़बड़ी का आंकड़ा बढ़ता गया। सबसे पहली जांच खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मंत्री राजेश नागर के निर्देश पर कराई गई थी, जिसमें 4904 गेहूं के बैग कम पाए गए। इस पर अशोक शर्मा के खिलाफ कुंजपुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें विभाग से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद जून माह में विजिलेंस जांच हुई, जिसमें 9585 बैग कम मिले। मामला यहीं नहीं रुका। 3 जुलाई को शिकायतकर्ता विकास शर्मा की मौजूदगी में गोदाम के स्टॉक की भौतिक जांच की गई, जिसमें करीब 1500 बैग खराब हालत में पाए गए। इसके ठीक 12 दिन बाद, यानी 15 जुलाई को निदेशक स्तर की जांच में बचे हुए स्टॉक में से 327 बैग और कम मिले। अब खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक की अंतिम जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पहली जांच के 4904 बैग को अलग रखते हुए दूसरी अवधि में 9951 बैग और गायब हुए हैं।
इस तरह अब तक 4904 बैग पहले, 9951 बैग बाद में गायब और 1500 बैग खराब होने की पुष्टि हो चुकी है। कुल मिलाकर 16,355 बैग का नुकसान सामने आया है। 4.49 करोड़ रुपये तक पहुंचा नुकसान
विभागीय आकलन के अनुसार एक गेहूं के बैग की औसत कीमत करीब 2750 रुपये मानी गई है। इस आधार पर 16,355 बैगों के नुकसान की कुल राशि लगभग 4.49 करोड़ रुपये बैठती है। यह आंकड़ा कुंजपुरा गोदाम में सामने आए अब तक के सबसे बड़े सरकारी अनाज घोटालों में शामिल हो गया है। रिकॉर्ड नहीं सौंपने पर अशोक शर्मा जिम्मेदार
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि निलंबन और पद से हटाए जाने के बावजूद तत्कालीन कस्टोडियन अशोक शर्मा ने गोदाम का पूरा रिकॉर्ड विभाग को नहीं सौंपा। विभाग की ओर से उन्हें कई बार पत्र भेजकर रिकॉर्ड जमा कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि गोदाम के कस्टोडियन होने के कारण स्टॉक और रिकॉर्ड की पूरी जिम्मेदारी अशोक शर्मा की थी। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने और स्टॉक में भारी कमी मिलने के आधार पर उन्हें दोषी मानते हुए उनके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज करवाई गई है। नई जांच टीम को मिली क्लीन चिट
मामले की जांच के लिए गठित नई टीम ने गोदाम के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया और इसकी पूरी वीडियोग्राफी कर जांच कमेटी को सौंपी। नियंत्रक ने वीडियो और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद टीम की कार्यप्रणाली को सही पाया और उसे किसी भी प्रकार की लापरवाही से मुक्त कर क्लीन चिट दे दी।
जांच में यह भी सामने आया है कि गोदाम में रखे गेहूं के चट्टों के बीच से कट्टे गायब किए गए थे, ताकि बाहर से देखने पर स्टॉक पूरा दिखाई दे और गड़बड़ी पकड़ में न आए। अब होगी रिकवरी और आपराधिक जांच
सूत्रों के अनुसार विभाग अब अशोक शर्मा के खिलाफ विभागीय चार्जशीट जारी कर सरकारी गेहूं की कीमत की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करेगा। दूसरी ओर पुलिस दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले की आपराधिक जांच को आगे बढ़ाएगी और यह पता लगाएगी कि इस गबन में अन्य अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी लोग भी शामिल थे या नहीं।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें