सरहद पार पाकिस्तान से हथियार मंगवाने व देश विरोधी आतंकी गतिविधियों में शामिल अमृतसर के एक व्यक्ति को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने उस पर पांच साल पहले दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका को निपटा दिया।
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हाईकोर्ट ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट पहले ही दोषी करार देकर 5 साल की सजा सुना चुका है, जिसके बाद इस याचिका का कोई औचित्य नहीं रह गया था। यह आदेश माननीय जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और माननीय जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ द्वारा जारी किया गया।
अब सारे मामले को छह प्वाइंटों में जानिए
ssoc भवन पर हमले की रच रहे थे साजिश
15 मार्च 2020 को अमृतसर के स्टेट स्पेशल ऑपरेशंस सेल (SSOC) थाने में सिकंदर सिंह अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोपी पर डकैती की साजिश (आईपीसी 399, 402), अवैध हथियार रखने (आर्म्स एक्ट की धारा 25) और यूएपीए की धाराओं 15, 16, 17, 18 व 18-बी के तहत देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने जैसे केस दर्ज किया।
आरोप था पुलिस एक गुप्त सूचना से शुरू होती है, जिसके अनुसार सिकंदर सिंह के गैंग के सदस्य मनोज ठाकुर, अमृतपाल सिंह और गुरसेवक सिंह अवैध हथियारों के साथ अमृतसर के SSOC भवन पर हमला करके अपने साथियों को छुड़ाने की साजिश रच रहे थे ।
सूचना के आधार पर पुलिस ने अमृतसर के तरनतारन रोड पर नाकाबंदी की और भागने की कोशिश कर रहे मनोज ठाकुर को धर-दबोचा, जिसके पास से भारी मात्रा में .30 बोर की पिस्तौल, ‘Underwood’ कार्बाइन, .32 बोर का रिवॉल्वर, कारतूस और एक वायरलेस सेट बरामद हुआ ।
लुधियाना के IIFL फाइनेंस की लूट से जुड़ा लिंक
मनोज की गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी सिकंदर सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। उसने पूछताछ में अपने घर के बाड़े में छुपाए गए तीन 12 बोर के गन, एक रिवॉल्वर, 110 कारतूस और एक जाली ड्राइविंग लाइसेंस बरामद करवाए। जांच को आगे बढ़ाते हुए 17 मार्च 2020 को पुलिस ने सुंदर नगर के पास से मारुति कार में भाग रहे अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार किया ।
अमृतपाल की निशानदेही पर पुलिस ने अमृतसर के एक बेसमेंट से पंप एक्शन गन और एक राइफल बरामद की। साथ ही उसने खुलासा किया कि उसने साथियों के साथ लुधियाना के फाइनेंस कंपनी IIFL से 30 किलो सोना लूटा था। इसमें से उसके हिस्से का 10 किलो 490 ग्राम सोना मोहाली से बरामद किया गया। बाद में आरोपियों के बयानों पर सोलन से एक मर्सिडीज और चंडीगढ़ से एक इनोवा कार बरामद की गई। जेल में बंद गगनदीप सिंह को भी इस मामले में नामजद किया गया ।
चालान पेश हुआ तो पहुंच गया हाईकोर्ट
पुलिस ने 7 सितंबर 2020 को इस मामले की जांच पूरी कर आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान (फाइनल रिपोर्ट) पेश किया। 11 सितंबर 2020 को अमृतसर के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने चालान पर संज्ञान लेते हुए मामले में कानूनी कार्यवाही शुरू करने के आदेश जारी किए।
दोषी जिला अदालत में खुद को घिरता देख साल 2021 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि उसके खिलाफ दर्ज एसएसओसी की एफआईआर, पुलिस के चालान और मजिस्ट्रेट के आदेश को तुरंत रद्द (Quash) किया जाए। जिसकी लगातार पांच साल सुनवाई चली, लेकिन फैसला नहीं आया।
जिला अदालत ने सुना दिया फैसला
दूसरी तरफ मामला हाईकोर्ट में लंबित रहने के दौरान अमृतसर की एडिशनल सेशंस जज बलजिंदर सिंह की अदालत में ट्रायल पूरा हुआ। अदालत ने 26 फरवरी 2026 को सिकंदर सिंह को दोषी ठहराते हुए पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
इस वजह से याचिका खारिज हो गई
इसी बीच सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी को निचली अदालत पहले ही दोषी ठहरा चुकी है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब आरोपी को सजा हो चुकी है, तब एफआईआर रद्द करने की याचिका का कोई औचित्य नहीं रह जाता। अदालत ने याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कोई भी वकील पेश नहीं हुआ। इसलिए कोर्ट में उसकी तरफ से कोई नए तर्क नहीं रखे जा सके। सरकारी वकील ने जैसे ही कोर्ट को बताया कि निचली अदालत उसे पहले ही दोषी मानकर 5 साल की सजा दे चुकी है, हाईकोर्ट ने उसके पुराने सभी तर्कों को सुने बिना ही याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए खारिज कर दिया।
इस मामले में हुई है सजा
दूसरी तरफ जिला अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों (UAPA) या डकैती का कोई ठोस सबूत नहीं था और डकैती के मामले में लुधियाना अदालत उन्हें पहले ही बरी कर चुकी थी । अदालत ने सिकंदर सिंह को भारी मात्रा में अवैध हथियार रखने के जुर्म में आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाते हुए 5-5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई ।
