Related Posts

Modi Govt Approves Kadia-Beas Rail Line Project Punjabs 100-Year Wait Ends


मोदी सरकार ने कादियां-ब्यास रेल लिंक किया मंजूर।

पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली 40 किलोमीटर लंबी कादियां-ब्यास रेल लाइन का करीब एक सदी (100 साल) पुराना इंतजार आखिरकार खत्म होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इसके लिए 1400 करोड़ रुपए मंजूर हो गए।

.

केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि दिसंबर में इस प्रोजेक्ट को डिफ्रिज करवाया और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने इस प्रोजेक्ट के लिए 1400 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए।

बिट्टू ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना 1928 में शुरू की गई थी जिसे पूरा होने में 100 साल लग गए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें इसे नहीं कर पाई और मोदी सरकार ने इसे पूरा कर दिया। उन्होंने का कि इस प्रोजेक्ट में पंजाब के पांच पैसे नहीं लगने हैं।

रवनीत सिंह बिट्‌टू, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री

ब्रिटिश काल (1928) से अब तक की कहानी सिलसिलेवार जानिए..

  • 1928 में परिकल्पना: इस ऐतिहासिक परियोजना की पहली बार परिकल्पना साल 1928 में की गई थी, जो आज लगभग एक सदी बाद हकीकत का रूप लेने जा रही है।
  • 1929-1932 : ब्रिटिश सरकार द्वारा 1929 में इसे औपचारिक मंजूरी दी गई और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने इस पर काम शुरू किया। हालांकि, 1932 तक करीब 33 प्रतिशत ट्रैक का काम पूरा होने के बाद इसे अज्ञात कारणों से रोक दिया गया था।
  • 2010 का रेल बजट: करीब 78 साल बाद, ममता बनर्जी के रेल मंत्रित्व काल में इसे “सामाजिक रूप से वांछनीय परियोजनाओं” (की श्रेणी में शामिल किया गया, जिसका मकसद मुनाफे से ऊपर उठकर लोगों को कनेक्टिविटी देना था। लेकिन तत्कालीन योजना आयोग की वित्तीय आपत्तियों के कारण यह फिर ठंडे बस्ते में चली गई।
  • सालों का गतिरोध: रूट अलाइनमेंट की तकनीकी दिक्कतों, जमीन अधिग्रहण के विवादों और स्थानीय राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह प्रोजेक्ट पूरी तरह ‘फ्रीज’ श्रेणी में डाल दिया गया था।रेललाइन का मैप

कादियां-ब्यास रेल लिंक के क्या-क्या फायदे होंगे जानिए…

  • अंतरराष्ट्रीय धार्मिक केंद्र को जुड़ाव: रवनीत सिंह बिट्‌टू ने कहा कि कादियां अहमदिया मुस्लिम संप्रदाय का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय है, वहां पूरी दुनिया से लगातार श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। इस रेल मार्ग से उन्हें सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।
  • श्रद्धालुओं के लिए सुगम यात्रा: बिट्‌टू ने कहा कि यह ट्रैक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा ब्यास और घुमान स्थित बाबा नामदेव डेरा आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन को बेहद आसान और सस्ता बना देगा।
  • बटाला के उद्योगों को सीधा कॉरिडोर: बटाला के स्थानीय स्टील और लोहा उद्योगों को इस मार्ग के जरिए सीधे अमृतसर-दिल्ली मुख्य रेल कॉरिडोर तक पहुंच मिल जाएगी, जिससे माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों घटेंगे।
  • देश की सुरक्षा के लिए रणनीतिक अहमियत: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी यह 40 किलोमीटर का ट्रैक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। यह भारतीय सेना और सैन्य रसद के लिए जम्मू-कश्मीर तक जाने वाला एक मजबूत और वैकल्पिक सप्लाई रूट प्रदान करेगा।

₹200 करोड़ का बजट पहुंचा ₹1400 करोड़ के पार

केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस संबंध में बेहद चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए हैं। बिट्टू ने स्पष्ट किया कि जिस रेल प्रोजेक्ट को कभी महज ₹200 करोड़ की लागत में पूरा होना था, वह सालों-साल लटके रहने के कारण अब ₹1400 करोड़ की भारी-भरकम राशि के साथ पूरा होगा।

₹33 करोड़ में मिलनी थी जमीन

इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 411.81 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी। जो जमीन पहले केवल ₹33 करोड़ में मिलनी तय हुई थी, आज भूमि की कीमतों में बढ़ोतरी और मुआवजे की नई नीतियों के कारण उसकी कीमत बढ़कर ₹300 करोड़ हो चुकी है। बिट्टू ने साफ किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पंजाब के रेलवे विकास की राह में फंड कभी भी रोड़ा नहीं बनेगा।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें