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सीएम तय करेंगे नगर निगम व नगर काउंसिलों के प्रधान का नाम। आम आदमी पार्टी की कोर कमेटी ने अधिकार दिए हैं।

पंजाब में निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों की जीत के बाद मेयर, नगर परिषद प्रधान और अन्य प्रमुख पदों पर नियुक्तियों का अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री भगवंत मान करेंगे। यह फैसला पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में लिया गया है।

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माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी विभिन्न नगर निकायों में मेयर, प्रधान और अन्य पदाधिकारियों के नामों को अंतिम रूप दे सकती है। 29 मई को 104 स्थानीय निकायों के चुनाव परिणाम घोषित किए गए थे, जिनमें आम आदमी पार्टी (AAP) ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया।

अब इस फैसले के पीछे की दो वजह जानिए:-

1. जातीय, धार्मिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने में मिलेगी मदद

2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मेयर चयन का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होने से पार्टी को राज्य स्तर पर जातीय, धार्मिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने में सुविधा होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी जिले का विधायक जट्ट सिख समुदाय से है, तो वहां शहरी हिंदू या दलित चेहरे को मेयर नियुक्त कर विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सकता है। पार्षदों के भरोसे चुनाव होने पर ऐसा संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है।

2. स्थानीय नेताओं और विधायकों पर नियंत्रण

अक्सर मेयर पद को लेकर स्थानीय विधायकों और नेताओं के बीच अपने समर्थक पार्षद को आगे बढ़ाने की होड़ लग जाती है, जिससे गुटबाजी बढ़ती है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के हाथ में होने से स्थानीय नेताओं को पार्टी लाइन का पालन करना पड़ता है। इससे अंदरूनी खींचतान कम होती है और संगठन में अनुशासन बना रहता है।

कुल 958 वार्डों में जीत दर्ज की

पार्टी ने 8 में से 5 नगर निगमों में बढ़त हासिल करने के साथ-साथ कुल 958 वार्डों में जीत दर्ज की। आठ प्रमुख नगर निगमों में AAP को मोगा, बरनाला, बठिंडा और बटाला में स्पष्ट बहुमत मिला। वहीं, मोहाली नगर निगम में 26 वार्ड जीतकर पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।

28 वार्ड जीतकर अपना दबदबा कायम रखा

दूसरी ओर, विपक्षी दलों को कुछ चुनिंदा शहरों में सफलता मिली। कपूरथला नगर निगम में कांग्रेस ने 50 में से 31 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया और AAP को पीछे छोड़ दिया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अबोहर नगर निगम में 28 वार्ड जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। पठानकोट नगर निगम में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, जिससे स्थिति त्रिशंकु रही। हालांकि, 22 वार्डों में जीत के साथ भाजपा यहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।



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