चंडीगढ़ रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह।
चंडीगढ़ पुलिस में वर्ष 2010 में क्लास-4 (वाटर कैरियर) के 11 पदों पर हुई भर्ती में कथित धांधली के मामले में रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह और इंस्पेक्टर नसीब सिंह के खिलाफ जिला अदालत में ट्रायल शुरू हो गया है। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज डॉ. हरप्रीत क
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मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी। अदालत ने सुनवाई के दौरान तीन गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए समन भी जारी किए हैं। दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में कथित रूप से अनियमितताएं कर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया।
ह मामला भारतीय न्याय संहिता लागू होने से पहले दर्ज किया गया था। इसमें आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 409, 467 और 471 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है।

जिला अदालत चंडीगढ़।
अब पढ़ें पूरा मामला:-
- 2016 में दर्ज हुई थी एफआईआर: यह मामला वर्ष 2010 में इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) में वाटर कैरियर (क्लास-4) के 11 पदों पर हुई भर्ती से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने पूरी भर्ती को रद्द कर दिया था। मामले की जांच के बाद विजिलेंस ने वर्ष 2016 में एफआईआर दर्ज की। जांच में रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह और इंस्पेक्टर नसीब सिंह की भूमिका सामने आने के बाद करीब दो वर्ष पहले उनके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
- डिस्चार्ज अर्जी भी हुई खारिज: दोनों आरोपित अधिकारियों ने अदालत में डिस्चार्ज अर्जी दाखिल कर आरोपों से मुक्त किए जाने की मांग की थी। रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह ने अपनी दलील में कहा कि उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस में 37 वर्षों तक बेदाग सेवा दी और 30 अप्रैल 2016 को सेवानिवृत्त हुए।
- साक्ष्य मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त: उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान 77 अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन किसी ने भी उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया। इंस्पेक्टर नसीब सिंह ने भी खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों को खारिज किया। हालांकि, अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त हैं। इसके बाद दोनों अधिकारियों की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई।
- 22 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने दिया था टेस्ट: भर्ती प्रक्रिया दो चरणों में आयोजित की गई थी। पहले चरण में 50 अंकों का ट्रेड टेस्ट और दूसरे चरण में 10 अंकों का इंटरव्यू होना था। ट्रेड टेस्ट के लिए तत्कालीन आईपीएस अधिकारी आर.एस. घुमन को चेयरमैन बनाया गया था, जबकि उनकी सहायता के लिए डीएसपी जगबीर सिंह और इंस्पेक्टर नसीब सिंह की ड्यूटी लगाई गई थी।
- 827 उम्मीदवार पहले चरण में सफल हुए थे: इस भर्ती के लिए 22,036 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 827 उम्मीदवार पहले चरण में सफल हुए थे। अंतिम परिणाम तैयार करते समय आईआरबी के तत्कालीन कमांडेंट अरुण कंपानी को अंक तालिका में गड़बड़ियां मिलीं। जांच में कई अभ्यर्थियों की मार्कशीट में अंक बढ़ाने और घटाने के प्रयास सामने आए, जिसके बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई और मामला विजिलेंस जांच तक पहुंचा।







