भिवानी में विदेश भेजने के नाम पर एक व्यक्ति 48 लाख 50 हजार रुपए ठगने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसे डंकी रूट से विदेश भेजने व नौकरी लगवाने के नाम पर 48 लाख 50 हजार रुपए ठगे हैं। वहीं पुलिस ने केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
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भिवानी के गांव नांगल निवासी रितिक ने भिवानी एसपी को शिकायत दी। जिसमें कहा कि वह वह विद्यार्थी है। मई 2024 में उसकी मुलाकात अमन शर्मा व श्रीराम शर्मा से हुई। उन्होंने उनका दोस्त मनोज पंवार बच्चों को विदेश भेजता है और नौकरी लगवाता है। जिस पर रितिक उनकी बातों में आ गया और आरोपियों ने उसे यूएसए में कैलिफोर्निया की नौकरी लगवाने का झांसा देकर 50 लाख रुपए की डिमांड की। साथ ही कहा कि नौकरी के दौरान 4-5 हजार डॉलर मिलेंगे। शिकायतकर्ता ने उनकी झांसे में आकर 30 मई 2024 को 8 लाख रुपए नकद व एक लाख रुपए खाते में डलवाए। 31 मई 2024 को एक लाख रुपए खातें में डलवाए।
उसने कहा कि 10 जून को 5 लाख रुपए नकद, 18 जून को 8 लाख रुपए नकद, 25 जून को 2 लाख रुपए नकद, 5 अगस्त 2024 को 3 लाख रुपए व 30 अगस्त को 5 लाख रुपए दिए। 30 अक्टूबर को 7 लाख रुपए, 30 नवंबर को 2 लाख 50 हजार रुपए, 7 दिसंबर 2024 को 5 लाख 50 हजार रुपए नकद दिए।
48.50 लाख ठगे उसने आरोप लगाया कि उसने रिश्तेदारों से उधार लेकर कुल 48 लाख 50 हजार रुपए दिए। 25 जून 2024 को शिकायतकर्ता को गाड़ी में दिल्ली लेकर गए। जहां पर उसका मेडिकल करवाया और 28 जून की रात को एयर टिकट से दिल्ली से कोलकाता एवं कोलकाता से बैंकाक थाईलेंड भेज दिया। 1 जुलाई 2024 को वह बैंकाक पहुंचा। उसके बाद गाड़ी में बैठकर कंबोड़िया पहुंचा। वहां 2 माह तक रहा और एक साल मल्टीप्लान वीजा दिलवाया। लेकिन कोई काम नहीं दिलवाया। इसलिए वह 1 सितंबर को दिल्ली की फ्लाइट पकड़कर दिल्ली आ गया। इसके बाद आरोपी फिर मिले और कहा कि वे अब उसे दूसरे देश भेज देंगे।
विदेशों में अवैध तरिके से घुमाता रहा रितिक ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने 13 सितंबर को मुंबई से परमामेरीबो पहुंचा। जहां पर आरोपी मनोज पंवार मिला और उसे नाव के जरिए अपने घर ले गया। रात को करीब 11 बजे नाव के जरिए गुयाना पहुंचाया और जहां से गाड़ी में बैठाकर ब्राजील लेकर गए। वहां से बोलविया से पेरू व पेरू से इक्वाडोर लेकर गए। इसके बाद कोलंबिया से निकोकली व निकोकली से कपूरधाना गए। कपूरधाना से पैदल पैनामा के जंगल में घुसाये और पैदल 7 दिन तक चलकर पैनामा के कैंप में पहुंचे। वहां तीन दिन छिपकर रहे।
इसके बाद कोस्टारिका पहुंचे और वहां से निकारागोवा गए। 8 दिसंबर 2024 को अवैध तरीके से तेजवाना बॉर्डर पार करवाकर यूएसए में ले गए। इसके बाद सरकार के आदेश पर 23 मार्च 2025 को वापस भेज दिया। दिल्ली पहुंचने के बाद घर आकर सारी बातें बताई। परिवार आरोपियों से मिला और उन्होंने पैसे वापस देने की बात कही, इसके बाद 13 मई 2025 को दुबई भेज दिया। वहां 3 महीने रहा, लेकिन नौकरी नहीं मिली। इसके बाद जब पैसे वापस मांगे तो धमकाने लगे। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस को दे दी। पुलिस ने केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी।
