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चंडीगढ़ में बनेगा डिजिटल म्यूजियम, हेरिटेज समिति की मंजूरी:चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बैठक, कैपिटल कॉम्प्लेक्स बफर जोन, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट मास्टर प्लान पर चर्चा




चंडीगढ़ की ऐतिहासिक और वास्तुकला विरासत को संरक्षित रखने के लिए गुरुवार को चंडीगढ़ हेरिटेज संरक्षण समिति (सीएचसीसी) की 27वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता यूटी के चीफ सेक्रेटरी एच. राजेश प्रसाद ने की। बैठक में शहर की विरासत से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इनमें सेक्टर-19 स्थित ले कॉर्बुजिए सेंटर में डिजिटल म्यूजियम बनाने, कैपिटल कॉम्प्लेक्स के बफर जोन के संशोधित जोनिंग प्लान और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समग्र विकास योजना के मास्टर प्लान पर विचार किया गया। बैठक में गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़, वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा, पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह, नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार, डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव, मुख्य अभियंता सीबी ओझा, मुख्य वास्तुकार राजीव मेहता, चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर की प्रिंसिपल डॉ. संगीता बग्गा मेहता सहित प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और हेरिटेज समिति के सदस्य मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत में मुख्य वास्तुकार राजीव मेहता ने 20 जनवरी 2026 को हुई 26वीं बैठक में लिए गए फैसलों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद पिछली बैठक की कार्यवाही को मंजूरी दी गई। ले कॉर्बुजिए सेंटर में बनेगा डिजिटल म्यूजियम बैठक का सबसे अहम प्रस्ताव सेक्टर-19 स्थित ले कॉर्बुजिए सेंटर में डिजिटल म्यूजियम बनाने का था। यह परियोजना भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना-2.0 के तहत तैयार की गई है। इसके लिए पर्यटन विभाग ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह ने समिति के सामने परियोजना का प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य भवन की ऐतिहासिक पहचान और हेरिटेज स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए विश्वस्तरीय डिजिटल म्यूजियम विकसित करना है। उन्होंने बताया कि परियोजना में ले कॉर्बुजिए सेंटर के इतिहास, शहर की वास्तुकला विरासत, पर्यटकों के लिए आकर्षण, प्रस्तावित डिजाइन, लागत, संभावित आय और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखा गया है। साथ ही उप-हेरिटेज समिति की ओर से दिए गए सभी सुझावों को भी परियोजना में शामिल किया गया है। समिति के सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के सुझावों पर चर्चा के बाद मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कैपिटल कॉम्प्लेक्स के बफर जोन पर फैसला टला बैठक में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल कैपिटल कॉम्प्लेक्स के बफर जोन में आने वाले सेक्टर-2, 3, 4 और 5 के संशोधित जोनिंग प्लान पर भी चर्चा हुई। शहरी नियोजन विभाग की वरिष्ठ नगर योजनाकार मंदीप मेहंदीरत्ता ने संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसमें चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के तहत भवनों की ऊंचाई और निर्माण संबंधी नियमों की जानकारी दी गई। चीफ सेक्रेटरी ने कहा कि कैपिटल कॉम्प्लेक्स के आसपास बफर जोन बनाने का उद्देश्य उसकी ऐतिहासिक और वास्तु पहचान को सुरक्षित रखना है। इसलिए इस विषय पर और विस्तृत अध्ययन की जरूरत है। उन्होंने शहरी नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि ठोस कारणों और तथ्यों के साथ संशोधित प्रस्ताव दोबारा समिति के सामने पेश किया जाए। फिलहाल इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया। हाईकोर्ट के समग्र विकास योजना पर भी चर्चा बैठक में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल कैपिटल कॉम्प्लेक्स स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समग्र विकास योजना (होलिस्टिक डेवलपमेंट प्लान) के मास्टर प्लान पर भी विचार किया गया। इंजीनियरिंग विभाग के सलाहकारों ने हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार तैयार मास्टर प्लान का प्रस्तुतीकरण दिया। विस्तृत चर्चा के बाद मुख्य सचिव ने इंजीनियरिंग विभाग को समिति की टिप्पणियों और हेरिटेज संरक्षण के नियमों के अनुसार प्रस्ताव में जरूरी बदलाव कर आगे की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। हेरिटेज संरक्षण और विकास साथ-साथ चलेगा बैठक के अंत में चीफ सेक्रेटरी एच. राजेश प्रसाद ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन शहर की अनूठी वास्तुकला और विश्व धरोहर पहचान को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शहर में होने वाला हर विकास कार्य यूनेस्को के दिशा-निर्देशों और हेरिटेज संरक्षण के नियमों के अनुरूप ही किया जाएगा, ताकि विकास के साथ-साथ चंडीगढ़ की ऐतिहासिक पहचान भी सुरक्षित रह सके।



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