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नूंह में एक गांव के तीन नाम:सरकारी रिकॉर्ड में भी अंतर, चार दशक से बनी समस्या, ग्रामीणों को हो रही परेशानी




नूंह जिले का एक गांव सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज तीन अलग-अलग नामों के कारण पहचान के संकट से जूझ रहा है। इस विसंगति से ग्रामीणों को विभिन्न कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में गांव का नाम ‘अल्लाहबास’ है, जबकि पंचायत विभाग इसे ‘लाहाबास’ के नाम से जानता है। राजस्व विभाग के दस्तावेजों और कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह गांव ‘इलाहाबाद’ के रूप में दर्ज है। इस भिन्नता के कारण ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं को सरकारी नौकरियों के आवेदन, आधार कार्ड, निवास और जाति प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बनवाने में परेशानी हो रही है। गांव के नाम को लेकर बार-बार आपत्तियां उठाई जाती हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। चार दशक से बनी समस्या, विसंगति को दूर करने के प्रयास नहीं ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या चार दशक से भी अधिक समय से बनी हुई है। इतने लंबे समय के बावजूद, किसी भी सरकारी विभाग ने इस विसंगति को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि सभी संबंधित विभागों के रिकॉर्ड का मिलान किया जाए और गांव के लिए एक ही अधिकृत नाम तय किया जाए। उनका मानना है कि इससे उनकी वर्षों पुरानी पहचान संबंधी उलझन समाप्त हो जाएगी। इन दो फोटो में देखिए एक ही गांव के अलग-अलग नाम अंकित है… डीसी बोले- सरकारी रिकार्ड में अधिकारिक नाम लाहाबास इस संबंध में डीसी अखिल पिलानी ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में गांव का वर्तमान आधिकारिक नाम ‘लाहाबास’ है, जबकि ‘इलाहाबाद’ उसका पुराना नाम दर्ज है। यही वजह हो सकती है कि अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड में भिन्न नाम दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी विभाग, जैसे स्कूल या पंचायत, को नाम बदलने में दिक्कत है, तो वे लिखित में आवेदन कर सकते हैं। किसी भी दस्तावेज में गांव का नाम LGD कोड 29550 के माध्यम से विभाग द्वारा बदला जा सकता है।



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