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हांसी में सिंचाई विभाग ने 15 इंजन जब्त किए:नहर किनारे लगे मोनोब्लॉक पंप हटाए, नहरी पानी चोरी रोकने को अभियान, किसान बोले-डीसी से मिलेंगे




हांसी में सिंचाई विभाग ने बुधवार को कुंभा-थुराना क्षेत्र में नहरी पानी की चोरी रोकने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया। इस दौरान विभाग ने अवैध रूप से लगाए गए लगभग 15 डीजल इंजन, मोनोब्लॉक, पाइप और होदियां जब्त कर हटा दीं। यह कार्रवाई शाम चार बजे तक चली, जिसमें विभागीय टीम ने नहर से अवैध रूप से पानी उठाने के कई साधनों को जब्त किया। अभियान में कार्यकारी अभियंता अजय कुंडू, जूनियर इंजीनियर अंकित बिसला, प्रदीप जागलान और सिंचाई कर्मचारी संघ के प्रधान अशोक यादव उपस्थित रहे। नहरी पानी की चोरी रोकना मुख्य उद्देश्य : कार्यकारी अभियंता कार्यकारी अभियंता अजय कुंडू ने बताया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य नहरी पानी की चोरी रोकना और नहर के अंतिम छोर (टेल) तक सभी किसानों को उनका हक का पानी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि कुछ किसान अवैध तरीकों से पानी उठाकर अन्य किसानों के हिस्से का पानी रोक रहे हैं, जो अनुचित है। कुंडू ने चेतावनी दी कि भविष्य में भी यदि कोई किसान अवैध रूप से पानी चोरी करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अवैध कनेक्शन और होदियों के मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर मुकदमे भी दर्ज कराए जाएंगे। सिंचाई विभाग की कार्रवाई से किसान नाराज विभाग की इस कार्रवाई के बाद खरकड़ा सहित चार गांवों के किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने गुरुवार को एक पंचायत बुलाकर उपायुक्त और स्थानीय विधायक को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। खरकड़ा के सरपंच प्रतिनिधि विजेंद्र बामल ने आरोप लगाया कि मानसून की कमी के कारण किसान पहले ही सूखे का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में खेतों से डीजल इंजन, मोटरें और पाइप हटाकर विभाग ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान बोले- अपनी लागत से लगाए थे साधन बामल के अनुसार, किसानों ने अपनी लागत से सिंचाई के साधन लगाए थे ताकि धान, कपास और बाजरे जैसी फसलों को बचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इन साधनों को हटा दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 29 जुलाई को किसानों और विभागीय कर्मचारियों के बीच केवल कहासुनी हुई थी, लेकिन जानबूझकर गंभीर आरोप लगाकर किसानों पर मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। किसानों की प्रमुख मांगें



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