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भारतीय सीमा में नुकसान साबित नहीं कर पाई बीमा कंपनी… रेलवे जिम्मेदार नहीं: हाईकोर्ट



पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय रेल परिवहन के दौरान माल गायब होने की स्थिति में भारतीय रेलवे को तभी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जब यह साबित हो कि नुकसान भारतीय रेलवे के अधिकार क्षेत्र में हुआ है। जस्टिस पंकज जैन ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए चंडीगढ़ रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखा। मामला 4 मई 1989 का है। पाकिस्तान के लाहौर से अमृतसर के लिए कॉपर स्क्रैप के 106 बैग भेजे गए थे। अमृतसर पहुंचने पर 9 बैग गायब मिले और करीब 1,104 किलोग्राम माल कम पाया गया। बीमा कंपनी ने संबंधित पक्ष को 36,732 रुपए का भुगतान किया और बाद में यह राशि रेलवे से वसूलने के लिए दावा दायर किया। रेलवे ने अदालत को बताया कि पाकिस्तान के लाहौर स्टेशन पर कॉपर स्क्रैप रखने के बाद ट्रेन के वैगन सील किए गए थे। अमृतसर पहुंचने तक यह सील पूरी तरह सुरक्षित थीं। उनमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई थी। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि चोरी भारतीय क्षेत्र में हुई। हाई कोर्ट ने 1890 के भारतीय रेलवे अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि माल की बुकिंग वर्ष 1989 में हुई थी, इसलिए इस मामले में इसी अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में असफल रही कि माल की कमी यानी किसी भी तरह की चोरी भारतीय रेलवे के अधिकार क्षेत्र में हुई थी। जब वैगन सीलबंद अवस्था में रवाना हुए और उसी स्थिति में अमृतसर पहुंचे, तो भारतीय रेलवे की लापरवाही मानने का कोई आधार ही नहीं बनता। अगर यहां यानी भारतीय क्षेत्र में सील खुली होती या इनसे कोई छेड़छाड़ होती तो बात अलग थी। इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने 1992 से लंबित अपील को निराधार मानकर खारिज कर दिया।



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