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₹13 लाख रिश्वत केस में फरार ओपी राणा का यू-टर्न:अग्रिम जमानत याचिका वापस ली; गैर-जमानती वारंट पहले से जारी, चंडीगढ़-मोहाली में चलाया ट्रैप ऑपरेशन




पंजाब विजिलेंस मुख्यालय से जुड़े 13 लाख रुपए की कथित रिश्वतखोरी के मामले में फरार चल रहे इंस्पेक्टर ओपी राणा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। गिरफ्तारी से बचने के लिए दायर उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सकारात्मक संकेत न मिलने पर राणा ने आज याचिका वापस ले ली। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया। मामला उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद चंडीगढ़ और मोहाली में ट्रैप ऑपरेशन चलाया था। जांच एजेंसी ने कथित बिचौलियों अंकित वधवा, राघव गोयल और विकास गोयल को शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपए नकद और एक महंगा मोबाइल फोन लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया ओपी राणा का नाम सीबीआई की प्रारंभिक जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान इंस्पेक्टर ओपी राणा की भूमिका भी सामने आई। जांच एजेंसी का दावा है कि रिश्वत की मांग और पूरी साजिश में उसकी संलिप्तता के संकेत मिले हैं। इसके बाद से ओपी राणा फरार चल रहा है। गैर-जमानती वारंट भी हो चुके जारी सीबीआई की कार्रवाई के बाद अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी कर दिए थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए राणा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन सुनवाई के दौरान राहत मिलने की संभावना कम दिखाई देने पर उसके वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। कानूनी मुश्किलें बढ़ीं हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद इंस्पेक्टर ओपी राणा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उसके खिलाफ पहले से गैर-जमानती वारंट जारी हैं और सीबीआई की जांच भी जारी है। ऐसे में जांच एजेंसी द्वारा उसकी गिरफ्तारी के प्रयास और तेज किए जाने की संभावना है।



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