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हरियाणा में अब नहीं होंगी जमीन बंजर:भूमि का ऑर्गेनिक कार्बन एनालिसिस होगा; सरकार किट खरीदेगी, 2.5 करोड़ होंगे खर्च




हरियाणा की भूमि को बंजर होने से बचाने और किसानों को अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है, जिसके तहत प्रदेश में ऑर्गेनिक कार्बन एनालिसिस किट खरीदी जाएंगी ताकि अब सटीक रूप से यह पता चल सके कि किसान के किस खेत में कितना ऑर्गेनिक कार्बन मौजूद है। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार की इस विशेष मुहिम का मुख्य उद्देश्य खेतों की सेहत को सुधारना और जमीन को बंजर होने से रोकना है। उन्होंने ऑर्गेनिक कार्बन एनालिसिस” किट खरीदने के लिए आज हाई पॉवर्ड परचेज कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जबकि विभागीय अधिकारियों की तरफ से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार सहित कई अन्य उच्च अधिकारी भी शामिल हुए। 2.5 करोड़ रुपए खर्च होंगे बैठक के विवरण और सरकार की योजना को साझा करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने कुल 332 ऑर्गेनिक कार्बन एनालिसिस किट की खरीद को मंजूरी दे दी है, जिन पर राज्य सरकार द्वारा लगभग 2.5 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी। इन आधुनिक किट्स के माध्यम से हरियाणा राज्य में सक्रिय कुल 106 सरकारी लैबोरेट्रीज (प्रयोगशालाओं) में किसानों के खेतों से लिए गए मिट्टी के सैंपलों की गहन जांच की जाएगी, जिससे किसानों को यह स्पष्ट रिपोर्ट मिल सकेगी कि उनकी मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की वास्तविक मात्रा कितनी है। 0.5 श्रेणी कम वाली जमीनें खराब वैज्ञानिक और कृषि मानकों का हवाला देते हुए उन्होंने आगे समझाया कि किसी भी खेत में अच्छी और भरपूर फसल उगाने के लिए मिट्टी के भीतर ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा कम से कम 0.5 से 0.75 प्रतिशत के बीच होनी ही चाहिए, जबकि एक आदर्श, सेहतमंद और बेहद उपजाऊ मिट्टी के लिए इस स्तर का 1 प्रतिशत या उससे अधिक होना सबसे उत्तम माना जाता है। उन्होंने चिंता जताते हुए यह भी कहा कि यदि मिट्टी की जांच के दौरान ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर 0.5 प्रतिशत से कम पाया जाता है, तो उस जमीन को बेहद कमजोर और बीमार श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि ऐसी स्थिति आने पर मिट्टी की पौधों को जरूरी पोषण देने की प्राकृतिक क्षमता धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म होने लगती है। कृषि मंत्री ने बताई ये जानकारी भूमि की उर्वरता में कार्बन की भूमिका को रेखांकित करते हुए कृषि मंत्री ने विस्तार से बताया कि ऑर्गेनिक कार्बन को वास्तव में मिट्टी की आत्मा या उसकी रीढ़ की हड्डी कहा जाता है, क्योंकि यह जमीन के भीतर छिपे रहने वाले केंचुओं और पौधों के मददगार सूक्ष्मजीवों का मुख्य भोजन होता है। जब किसी खेत की मिट्टी में इसकी सही और पर्याप्त मात्रा बनी रहती है, तो मिट्टी की पानी सोखने की शक्ति बढ़ जाती है और वह नमी को लंबे समय तक अपने भीतर संजोकर रख सकती है, जिसका सीधा फायदा यह होता है कि फसलें कम पानी या सूखे जैसी विषम परिस्थितियों को भी आसानी से झेल जाती हैं। जमीन के लिए पोटाश बेहद जरूरी इसके साथ ही, यह जैविक कार्बन नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे बेहद जरूरी और मुख्य पोषक तत्वों को मिट्टी में मजबूती से बांधकर रखता है और उन्हें सीधे पौधों की जड़ों तक आसानी से पहुंचाने का काम करता है, जिसके परिणामस्वरूप फसलों की जड़ें जमीन में गहराई तक जाकर अच्छी तरह फैल पाती हैं और किसानों की रासायनिक खादों पर से निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाती है।



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