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मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज का स्टाफ हड़ताल पर, मरीज लौटे:2 महीने से नहीं मिली सैलरी; कुरुक्षेत्र में HSGMC-SGPC को सौंप चुके ज्ञापन




कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पिछले दो महीने की सैलरी नहीं मिलने के विरोध में सोमवार को डॉक्टर और कर्मचारियों ने सांकेतिक हड़ताल कर दी। हड़ताल के कारण अस्पताल की ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं और इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गईं, ताकि गंभीर मरीजों का उपचार प्रभावित न हो। असल में हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के पक्ष में आए कोर्ट के फैसले के बाद अस्पताल का प्रशासनिक मामला उलझा हुआ है। HSGMC और SGPC को सौंप चुके ज्ञापन इसी बीच डॉक्टरों और कर्मचारियों को पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार सेवाएं देने के बावजूद उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा। स्टाफ ने सैलरी की मांग को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से भी गुहार लगाई थी। झींडा को दिया था ज्ञापन डॉक्टरों और कर्मचारियों ने 3 जून को HSGMC के प्रधान जगदीश सिंह झींडा को सैलरी जारी कराने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन के बाद अगले दिन कमेटी की बैठक भी हुई थी। इसमें जगदीश सिंह झींडा सहित कमेटी के सिर्फ 12 सदस्य मौजूद रहे। इस कारण कोई समाधान नहीं हुआ। अब इसी के विरोध में सोमवार को सांकेतिक हड़ताल की गई। OPD हुई प्रभावित हड़ताल के कारण अस्पताल की नियमित सेवाएं प्रभावित रहीं। दूर-दराज क्षेत्रों से इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के चलते उनको इलाज नहीं मिल सका। मई में हुए 300 से ज्यादा ऑपरेशन अस्पताल के CEO डॉ. संदीप चीमा ने कहा कि डॉक्टर और पूरा स्टाफ पूरी निष्ठा से मरीजों की सेवा कर रहा है, लेकिन तीन महीने से सैलरी नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। मई महीने में अस्पताल में 300 से ज्यादा ऑपरेशन किए गए, जबकि करीब 13 हजार मरीजों की जांच और इलाज किया गया। आंदोलन की चेतावनी डॉक्टरों और कर्मचारियों ने मांग की है कि लंबित सैलरी तुरंत जारी किया जाए। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं, लेकिन नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल मंडराने लगा है।



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