हरियाणा के रेवाड़ी की शर्मिला धनखड़ ने रोडवेज की पहली महिला कंडक्टर से 2026 पैरा कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड जीतने तक का सफर तय किया है। एक पैर से 40 प्रतिशत दिव्यांग होते हुए भी हिम्मत नहीं हारी और 2026 पैरा कॉमनवेल्थ गेम में शॉट पुट में पहला स्थान हासिल किया है। अब शर्मिला लॉस एंजिल्स 2028 पैरालिंपिक की तैयारी में जुटी हुई हैं। रेवाड़ी के सनसिटी की रहने वाली शर्मिला को साल 2018 हड़ताल के दौरान हरियाणा रोडवेज में कंडक्टर की नौकरी मिली थी। लेकिन हड़ताल खत्म हाेने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। 10 दिन तक लगातार बधाई का दौर चला लेकिन अचानक से नौकरी चली गई। जिसके बाद शर्मिला ने ठाना कि अब वह कुछ ऐसा करेगी, जो कोई उससे छीन न सके।
शर्मिला के पति अजित ने कहा कि वे क्यों न खेल की तैयारी करे, जिससे उसे आसानी से नौकरी मिल जाए। उसके बाद उसने खेल शुरू किया। अब सरकारी नौकरी के ऑफर मिल रहे हैं, लेकिन उसका सपना बदल चुका है।
अब जानिए शर्मिला का संघर्ष… जीत से रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ में खुशी का माहौल
शर्मिला धनखड़ की जीत के बाद रेवाड़ी व महेंद्रगढ़ दोनों ही जगहों पर खुशी का माहौल है। रेवाड़ी शहर के सनसिटी में ससुराल पक्ष व महेंद्रगढ़ के छितरौली गांव में मायके वाले भी देश वापसी पर स्वागत की तैयारियों कर रहे हैं।
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हरियाणा की पहली महिला कंडक्टर से कॉमनवेल्थ तक सफर:दिव्यांगता को मात दे चुकी 2 बच्चों की मां शर्मिला, सीटेड शॉट पुट इवेंट में गोल्ड जीता
