सिरसा के सिंकदरपुर डेरे में सेवादार की मौत पर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के परिवार ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाए कि डिग्गी में दो फुट में कैसे डूब गया और उसे निकालने के लिए जेसीबी बुलानी पड़ी। डेरा वाले बार-बार अलग बयान दे रहे हैं। इसलिए परिवार को उनकी बातों पर विश्वास नहीं है और सेवा करने गए युवक की मौत मामले में परिजनों ने सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप, डेरे वालों ने पहले बताया कि डिग्गी में गिरे एक व्यक्ति को निकाल दिया, पर गुरदीप को निकालने को जेसीबी बुलाई। डिग्गी इतनी न गहरी तो न उसमें दो फुट से ज्यादा पानी। ऐसे कैसे डूब गया। शक है कि उस पर ऊपर से कोई मलबा गिरा है, जिससे उसकी मौत हो गई। घरवालों ने डिग्गी से कुछ मलबा निकाल, जो ताजा बताया है। डिग्गी के ऊपर से लेंटर का हिस्सा टूटा पड़ा है। वहीं, प्रधान रवि अरोड़ा, मेरे पास 4.26 पर फोन आया था तो यहां पहुंचा और सेवादारों को बुलाया। मेरे आने तक गुरदीप को बाहर निकाल रखा था और उसकी छाती दबाकर सांस देने की कोशिश कर रहे थे। एंबुलेंस बुलाई हुई थी। गुरदीप को उठाकर सिविल अस्पताल में लेकर गए। इतने में ये सब कुछ हो गया। जानिएं पूरा मामला क्या है पत्नी बोली, मुझे छोड़कर आ गए और बाद में किसी ने फोन नहीं उठाया
गुरदीप के दो बच्चे हैं और दो परिवार का घर चला रहा था। पत्नी बोली, 3.50 मिनट पर उसे छोड़कर आ गया और कहा, पांच मिनट में वापस आ जाऊंगा। डेरा वालों ने ये नहीं बताया कि सीवरेज में क्लंप लगाना है। हमें कहा था कि तीन नंबर टंकी पर लगाना है। चार बजे के बाद फोन किए, पर किसी ने नहीं उठाया। हमें इंसाफ चाहिए। आरोप- न सेफ्टी तो न कुछ और था परिवार ने बताया कि करीब साढ़े 5 बजे डेरा की ओर से फोन आया और उस वक्त वह काम पर था तो कुछ नहीं बताया। उनको सरकारी अस्पताल में आने को कहा। घरवालों ने डेरे में कई बार फोन किए, परंतु किसी ने नहीं बताया। पहले बोले, डिग्गी में गिर गया, फिर बोले, सेफ्टी बेल्ट टूट गई थी। मगर यहां मौके पर पहुंचा तो न सेफ्टी थी तो न और कुछ। यहां सिर्फ रस्सा पड़ा था। सबको अलग-अलग बात बता रहे हैं। मौत का असल कारण नहीं बताया है। आरोप-डेरा वालों की बातों पर नहीं विश्वास 38 वर्षीय गुरदीप सिंह सप्ताह के हर शनिवार व रविवार को डेरे में सेवा करने के लिए आते थे। काफी समय से डेरे में आ रहे थे। यह डेरे में डिग्गी में पलंबर का काम था। इसी सेवा में गुरदीप को लगा दिया। साथ में तीन व्यक्ति और काम कर रहे थे। गुरदीप को डिग्गी में अंदर भेज दिया और बाकी तीन ऊपर थे। डिग्गी में इतना पानी भी नहीं है तो गुरदीप ही अकेला कैसे डूब गया, बाकी बच गए। कभी डेरा वाले कहते कि उसे जेसीबी ने आकर गुरदीप को निकाला है तो कभी कहते कि उसे रस्से से बाहर निकाला है। इनकी बातों पर ही विश्वास नहीं है। डिग्गी में मलबा गिरा मिला तो निजी अस्पताल नहीं लेकर गए गुरदीप खुद आर्शीवाद अस्पताल में काम करता था। उसे निजी अस्पताल में नहीं लेकर गए। सिविल अस्पताल में घायलवस्था में ले गए, जहां पर इतनी सुविधा नहीं है। शुक्रवार शाम 4 बजे ये हादसा हुआ और परिवार को पांच बजे सूचना दी। परिवार ने मौके पर पहुंचे तो डिग्गी को देखककर हैरान रह गए। डिग्गी में दो फुट तक पानी है, उसमें डूब ही नहीं सकते। बाइक व फोन यहीं पर था।
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