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लाहौर में पंजाब के दिवंगत CM के नाम पर क्लासरूम:हरचरण बराड़ की स्मृति में होगा प्रोग्राम; सरहद पार दिखेगी दोस्ती की अनूठी मिसाल




भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे की लकीरें भले ही कितनी गहरी रही हों, लेकिन कुछ रिश्तों और पुरानी यादों के आगे ये सरहदें हमेशा बौनी साबित हुई हैं। ऐसी ही एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक मिसाल पाकिस्तान के लाहौर से सामने आ रही है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. हरचरण सिंह बराड़ की याद में लाहौर के बेहद प्रतिष्ठित ऐचिसन कॉलेज में एक क्लासरूम का नाम उनके नाम पर रखा जा रहा है। दिवंगत मुख्यमंत्री के पोते तेगबीर सिंह बराड़ ने बताया कि यह पहल उनके दादा जी के सबसे करीबी मित्र और पाकिस्तान के जाने-माने उद्योगपति व परोपकारी सैयद बाबर अली ने की है। शताब्दी वर्ष पर भाई को अनोखा तोहफा सैयद बाबर अली आगामी 30 जून को अपने जीवन के 100 साल पूरे करने जा रहे हैं। चूंकि असली तारीख के दिन मुहर्रम है, इसलिए उनके जन्म शताब्दी वर्ष का जश्न 7 जून को ही मनाया जा रहा है। इसी समारोह के तहत 10 जून (बुधवार) शाम 5 बजे ऐचिसन कॉलेज में क्लासरूम को हरचरण सिंह बराड़ की स्मृति में समर्पित किया जाएगा। तेगबीर सिंह बराड़ ने भावुक होते हुए कहा मेरे दादाजी और बाबर अंकल सगे भाइयों की तरह थे। अंकल बाबर अपने 100वें जन्मदिन के मौके पर एचिसन कॉलेज में मेरे दादाजी की याद में एक क्लासरूम समर्पित कर रहे हैं। यह हमारे पूरे परिवार के लिए एक गर्व का क्षण है। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी बबली बराड़ पहले ही पाकिस्तान रवाना हो चुकी हैं। क्लासरूम में ही शुरू हुई थी ‘मजहब से ऊपर’ वाली दोस्ती एक वीडियो इंटरव्यू में 100 वर्षीय सैयद बाबर अली ने अपने बचपन के दोस्त हरचरण सिंह बराड़ को बेहद शिद्दत से याद किया। उन्होंने बताया कि उनकी दोस्ती साल 1936 में एचिसन कॉलेज में शुरू हुई थी। क्लास IV-A का वो साथ:सैयद बाबर अली ने बताया,जब मैं तीसरी कक्षा में आया तो सेक्शन ‘ए’ में था और हरचरण ‘बी’ में। चौथी कक्षा में हम दोनों एक ही सेक्शन (IV-A) में आ गए और यहीं से हमारी दोस्ती की शुरुआत हुई।”

दिलचस्प मुकाबला: हरचरण पढ़ाई में बहुत होशियार थे और मैं भी ठीक-ठाक था। हम दोनों में हमेशा एक स्वस्थ मुकाबला रहता था। मजहब कभी दीवार नहीं बना: बाबर अली ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा,वह गुरुद्वारे जाते थे और मैं मस्जिद, लेकिन हमारी सोच एक जैसी थी। मजहब का अंतर हमारी दोस्ती के आड़े कभी नहीं आया। हम दोनों पंजाबी में बात करते थे। वह बोर्डर (हॉस्टल में रहने वाले) थे और मैं डे-स्कॉलर, लेकिन हमारा दिल हमेशा जुड़ा रहा। उर्दू के मुरीद थे हरचरण सिंह बराड़: सैयद बाबर अली ने बराड़ के व्यक्तित्व का एक और दिलचस्प पहलू साझा करते हुए बताया कि हरचरण सिंह बराड़ को उर्दू भाषा से बेहद लगाव था। वह जब स्कूल में थे, तब लाहौर से अपने गांव (सराएनागा, श्री मुक्तसर साहिब) अपनी मां को उर्दू में ही खत लिखा करते थे। ऐचिसन कॉलेज के ‘गोल्ड मेडलिस्ट’ रहे थे पूर्व सीएम: अगस्त 1995 से नवंबर 1996 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे हरचरण सिंह बराड़ (जिनका सितंबर 2009 में निधन हो गया) ने साल 1936 से 1943 तक ऐचिसन कॉलेज में पढ़ाई की थी। वह अपने समय में स्कूल के हेड प्रिफेक्टथे और उन्हें कॉलेज के प्रतिष्ठित रिवाज़ गोल्ड मेडल’ से भी नवाजा गया था। मुख्यमंत्री बनने से पहले वह ओडिशा और हरियाणा के राज्यपाल भी रहे। सरहद पार इस कदम के गहरे मायने पाकिस्तान के किसी बड़े और टॉप-नॉच शिक्षण संस्थान में किसी भारतीय राजनेता को इस तरह का सम्मान दिया जाना बेहद दुर्लभ और बड़ी बात मानी जा रही है। ऐचिसन कॉलेज के मानद दूत तरुंजीत सिंह बुटालिया ने बताया कि लाहौर में यह समारोह होगा, जिसमें मैं खुद भी शामिल हो रहा हूं। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के बड़े-बड़े शिक्षाविद्, बिजनेसमैन और कई नामी हस्तियां शिरकत करने जा रही हैं। यह आयोजन साबित करता है कि राजनीति और सरहदों की बंदिशों से इतर, दिलों के रिश्ते आज भी जिंदा हैं।



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