रोहतक में प्राइवेट स्कूलों में निजी पब्लिशर्स की किताब लगाने के विरोध में आर्गेनाइजेशन फॉर डेवलपमेंट एंड हेल्थ अफेयर्स की तरफ से छात्र पंचायत का आयोजन किया गया। इनेलो के छात्र संगठन सहित अन्य संगठन के सदस्यों ने भाग लिया। छात्र पंचायत में 6 जुलाई को आंदोलन कर डीसी को ज्ञापन देने का निर्णय लिया। आर्गेनाइजेशन फॉर डेवलपमेंट एंड हेल्थ अफेयर्स जिलाध्यक्ष निश्चय नरवाल ने बताया कि शिक्षा विभाग के पास एक जादू की छड़ी है। जो आदेश से पहले ही जांच कर देती है। जांच के आदेश 2 जून को हुए, जबकि बीईओ ने जवाब दिया कि 2 माह पहले ही स्कूलों की जांच कर चुके है और सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताब पढ़ाई जा रही है। डीसी को मामले का पता ही नहीं
निश्चय नरवाल ने बताया कि डीसी को अभी तक मामले के बारे में जानकारी ही नहीं है। 12 जून को डीडीपीओ राजपाल चहल ने ज्ञापन लिया था और आश्वासन दिया था कि डीसी को मामले से अवगत करवाया जाएगा। जब डीसी से इस बारे में मिले तो उन्हें कुछ पता ही नहीं था। 6 जुलाई को अगर डीसी ने ज्ञापन नहीं लिया तो वह रोड जाम करने पर विवश हो जाएंगे। स्कूलों में बच्चों को टारगेट करते शिक्षक
निश्चय नरवाल ने बताया कि अभिभावक इसलिए सामने नहीं आ रहे, क्योंकि स्कूल प्रशासन बच्चों की पहचान करके उन्हें परेशान करने लग जाता है। लेकिन अभिभावकों का पूरा साथ है। 6 जुलाई को अभिभावक भी साथ होंगे। अगर प्राइवेट स्कूलों में कालाबाजारी बंद नहीं हुई तो सड़क बंद होगी। प्रशासन ने जोर जबरदस्ती करने का प्रयास किया तो कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। प्राइवेट स्कूलों में जनता को लूटा जा रहा
इनेलो की छात्र विंग आईएसओ के जिलाध्यक्ष विश्वास भाली ने कहा कि सरकारी स्कूलों की हालत खराब है और प्राइवेट स्कूलों में लोगों को लूटने का काम किया जा रहा है। छात्र संगठन जैसा भी सहयोग चाहते है, आईएसओ उनके साथ खड़ी है। पूरा जिला प्रशासन बिका हुआ है। डीईओ, बीईओ की मिलीभगत है। विश्वास भाली ने कहा कि प्रशासन ने कोई कमेटी नहीं बना रखी। स्कूलों में 4 हजार से लेकर 5 हजार तक किताब बेच रहे है। कोचिंग सेंटर के नाम पर जिले में करीब 400 से अधिक अकेडमी है और शिक्षा विभाग के अधिकारी अकेडमी वालों के साथ सेटिंग करके उनके ऊपर कार्रवाई नहीं करते। बच्चों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़
आर्गेनाइजेशन फॉर डेवलपमेंट एंड हेल्थ अफेयर्स प्रदेशाध्यक्ष युद्धवीर सिंह नरवाल ने बताया कि पूरे हरियाणा के अभिभावकों को बच्चों के साथ खड़े होकर आंदोलन में शामिल होना चाहिए। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को टारगेट किया जाता है और शिक्षा विभाग आंखे बंद करके बैठा है। युद्धवीर नरवाल ने बताया कि शिक्षा विभाग के साथ प्राइवेट स्कूलों की सांठ-गांठ है। जब बच्चों की शिकायत विभाग के पास है तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी एक्शन लेना चाहिए। अधिकारी केवल जांच के नाम पर खानापूर्ति करते है। कभी भी स्कूलों में जाकर किताबों की जांच नहीं करते।
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