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यमुनानगर में मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन धरना मामला:तीसरी बार नोटिस, 22 अप्रैल तक पेश होने का आदेश; हाजिर न होने पर होगी कार्रवाई




यमुनानगर के मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन पर 2024 में ट्रेन रोककर धरना प्रदर्शन करने के मामले में रेलवे पुलिस ने अब तीसरी बार प्रदर्शनकारियों को नोटिस भेजकर पेश होने के आदेश दिए हैं। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय पर उपस्थित न होने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस प्राप्त करने वालों में पूर्व विधायक बिशनलाल सैनी के पुत्र विशाल सैनी, भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू, गांव ऊंचा चंदना के सरपंच सतपाल, गांव माली माजरा के सरपंच राजबीर, गांव दौलतपुर के पूर्व सरपंच कृष्ण सैनी, समाजसेवी रवि मठानिया और कांग्रेस नेता परमजीत धीमान सहित अन्य लोग शामिल हैं। 7 अप्रैल को घरों पर चस्पाए गए थे नोटिस इससे पहले 7 अप्रैल को भी इनके घरों के बाहर नोटिस चस्पा किए गए थे, जिनमें 10 अप्रैल तक बराड़ा में आरपीएफ के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, उस समय कोई भी पेश नहीं हुआ। इसके बाद अब तीसरी बार नोटिस जारी करते हुए 22 अप्रैल तक का समय दिया गया है। भाकियू नेता संजू ने बताया कि रेलवे पुलिस की यह कार्रवाई 22 फरवरी 2024 को मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन पर हुए धरना-प्रदर्शन से संबंधित है। उस दिन किसानों ने ट्रेन के ठहराव की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन किया था। रेलवे द्वारा तीसरी बार जारी नोटिस में ये लिखा है- नोटिस में उल्लेख है कि 22 फरवरी 2024 को प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक पर बैठकर रेल आवागमन बाधित किया था। इस मामले में 24 फरवरी को रेलवे एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। अब इस केस में गवाही देने और अन्य लोगों की पहचान के लिए उन्हें 22 अप्रैल सुबह 10 बजे तक बराड़ा रेलवे स्टेशन पर उपस्थित होना होगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अनुपस्थित रहने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों पर वादाखिलाफी का आरोप जिलाध्यक्ष संजू गुन्दियाना ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने पहले आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में वादाखिलाफी करते हुए केस दर्ज कर दिए। उन्होंने बताया कि कोरोना काल (2019-20) में लॉकडाउन के दौरान पैसेंजर ट्रेनें बंद कर दी गई थीं, जिससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो गई थी। कोरोना के बाद भी ट्रेनों का संचालन बहाल नहीं किया गया। संजू के अनुसार, ग्रामीणों ने एक साल तक अधिकारियों से लगातार संपर्क किया। डीआरएम, उत्तर रेलवे अंबाला से लेकर हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और कुरुक्षेत्र से सांसद नायब सैनी को भी ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन समाधान नहीं निकला। इसके बाद 22 फरवरी 2024 को ग्रामीणों ने मजबूर होकर मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन पर शांतिपूर्ण धरना दिया। उस दौरान रेलवे विभाग के एआरएम हनुमान प्रसाद ने मौके पर पहुंचकर दो दिन में ट्रेनों का ठहराव बहाल करने और किसी भी ग्रामीण पर कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया था। इसी के बाद धरना समाप्त कर दिया गया, लेकिन बाद में केस दर्ज कर दिया गया। बैठक में होगा अगला फैसला समाजसेवी रवि मठानिया ने बताया कि तीसरी बार मिले नोटिस पर 22 अप्रैल तक पेश होना है या नहीं, इस पर सभी प्रदर्शनकारी बैठक कर निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि यदि इस बार भी पेश नहीं हुए तो गिरफ्तारी वारंट जारी हो सकते हैं। वहीं, भाकियू ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि यदि प्रशासन ने ग्रामीणों को परेशान करना बंद नहीं किया, तो वे दोबारा रेलवे ट्रैक जाम करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि कार्रवाई वादाखिलाफी करने वाले अधिकारियों पर होनी चाहिए, न कि ग्रामीणों पर। यदि केस वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा।



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