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मोबाइल टॉर्च में सिजेरियन डिलीवरी मामले की जांच तेज:डॉक्टर, नर्स, बिजली कर्मचारी और स्टाफ से होगी पूछताछ; जांच में इनवर्टर की तकनीकी खराबी आई सामने




पलवल के जिला नागरिक अस्पताल में मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी किए जाने का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी गठित की गई है। समिति सोमवार को ऑपरेशन से जुड़े डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों, बिजली कर्मचारियों और अन्य संबंधित कर्मियों के बयान दर्ज करेगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर के भीतर वीडियो बनाना मरीज की गोपनीयता का उल्लंघन है, जो अस्पताल के नियमों के विपरीत है। पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, ओटी (ऑपरेशन थिएटर) में मौजूद एनेस्थीसिया के डॉ मुकेश के द्वारा इस वीडियो को बनाकर अस्पताल के ग्रुप में डाला गया। जहां से ये वीडियो दूसरी जगहों पर वायरल की गई। इस मामले की जांच लिए डॉ. संजय, डॉ. सुरेश, डॉ. संदीप किशोर और एक नर्सिंग स्टाफ को कमेटी में रखा गया है। ऑपरेशन के बाद महिला और नवजात को स्पेशल केयर वार्ड में भर्ती रखा गया था। दोनों की हालत सामान्य रहने पर शनिवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। प्राथमिक जांच में सामने आई तकनीकी खामी अस्पताल सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ऑपरेशन थिएटर के इनवर्टर की बैटरी के तार पर कार्बन जमा होने के कारण तार टूट गया था। इस तकनीकी खराबी पर अस्पताल में बिजली का काम करने वाले कर्मचारियों का ध्यान नहीं गया। यही वजह रही कि बिजली गुल होने पर इनवर्टर बैकअप उपलब्ध नहीं करा सका। अस्पताल में बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद जनरेटर के ऑटो स्टार्ट होकर सप्लाई देने में लगभग 3 मिनट का समय लगता है। इसी दौरान ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह अंधेरे में रहा। सूचना मिलने पर बिजली कर्मचारी ओटी पहुंचे, लेकिन तब तक जनरेटर से बिजली आपूर्ति बहाल हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने इनवर्टर की बैटरी के कनेक्शन को ठीक किया। जानें…उस रात क्या हुआ? अस्पताल प्रशासन के अनुसार, गुरुवार रात करीब 10 बजे एक गर्भवती महिला को सिजेरियन डिलीवरी के लिए ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया था। ऑपरेशन शुरू होते ही अचानक बिजली चली गई। आपातकालीन इनवर्टर भी तकनीकी खराबी के कारण काम नहीं कर सका। डॉक्टरों के सामने तत्काल ऑपरेशन रोकने या उसे जारी रखने की चुनौती थी। मरीज और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में सर्जरी जारी रखी। करीब तीन मिनट बाद जनरेटर चालू होने पर बिजली आपूर्ति बहाल हो गई। पूरी सर्जरी लगभग 15 मिनट में सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई। मां और नवजात पूरी तरह सुरक्षित अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ऑपरेशन सफल रहा और मां व नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। दोनों को निगरानी के लिए स्पेशल केयर वार्ड में रखा गया, जहां से शनिवार को छुट्टी दे दी गई। सीएमओ डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ ने स्वयं महिला और उसके परिजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। 18 करोड़ के अस्पताल में बैकअप व्यवस्था पर सवाल घटना के बाद अस्पताल की बिजली व्यवस्था और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस अस्पताल भवन के निर्माण पर करीब 18 करोड़ रुपए खर्च किए गए और हाल ही में लगभग 7.5 करोड़ रुपए की लागत से मरम्मत कराई गई, वहां ऑपरेशन थिएटर की बैकअप बिजली व्यवस्था का पूरी तरह विफल हो जाना चिंताजनक माना जा रहा है। 100 से बढ़ाकर 200 बेड किए जा चुके इस अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाएं होने का दावा किया जाता है, लेकिन आपातकालीन परिस्थितियों में बिजली बैकअप का फेल होना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला ऐसा पहला मामला नहीं है। इससे पहले 16 मई 2026 की रात फरीदाबाद के सेक्टर-3 स्थित एफआरयू-2 अस्पताल में भी प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी थी। आरोप था कि इमरजेंसी गेट बंद था और काफी देर तक कोई ड्यूटी स्टाफ मौके पर नहीं पहुंचा। मजबूरन महिला के परिजनों ने अस्पताल की पार्किंग में मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में ही प्रसव कराया था। उस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक स्टाफ नर्स का तबादला, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को निलंबित तथा एनएचएम के एक जनरल ड्यूटी असिस्टेंट की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। हालांकि बाद में विरोध के बाद उसकी बहाली कर दी गई। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। रोजाना करीब 2 हजार तक आते हैं मरीज पलवल जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन लगभग दो हजार के करीब मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां हर महीने औसतन 25 से 30 ऑपरेशन किए जाते हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 2024 में अस्पताल की क्षमता 100 से बढ़ाकर 200 बेड कर दी गई थी। इसके बावजूद अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, बिजली बैकअप की कमजोर व्यवस्था और तकनीकी खामियों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। अस्पताल की बिजली हॉटलाइन से जुड़ी होने के बावजूद कई बार बिजली आपूर्ति बाधित होती है और जनरेटर तथा इनवर्टर जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी समय पर काम नहीं कर पातीं, जिससे मरीजों की सुरक्षा और उपचार दोनों प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।



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