शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। मजीठा थाने से जबरन अपने साथी को छुड़ाने को लेकर उन पर केस दर्ज हुआ है। वहीं इस बीच अमृतसर जिला अदालत ने अमृतसर ग्रामीण पुलिस को आदेश दिया है कि 24 घंटे के भीतर मजीठिया के वकीलों को एफआईआर की कॉपी उपलब्ध करवाई जाए, ताकि वे मामले में कानूनी कार्रवाई और पैरवी कर सकें। मजीठा थाना एसएचओ द्वारा एफआईआर की कॉपी उपलब्ध न कराने के खिलाफ अमृतसर कोर्ट में याचिका दायर की थी। वकीलों का कहना है कि मजीठिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर की प्रति अब तक उपलब्ध नहीं करवाई है। अमनबीर सिंह सियाली, एडवोकेट बाठ और प्रदीप सैनी ने अमृतसर कोर्ट में यह याचिका दाखिल की है। जानकारी के मुताबिक मजीठिया का नया विवाद उनके साथी से जुड़ा है, जिसे पुलिस ने जबरदस्ती उठा लिया था। पुलिस का आरोप है कि बिक्रम मजीठिया मजीठा पुलिस थाने पर हमला कर आरोपी को छुड़ा ले गए। साथ ही रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद अमृतसर पुलिस ने मजीठिया और उनके साथियों पर केस दर्ज किया। ऐसे में उस केस में बचने के लिए मजीठिया के वकीलों ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका 1 जून को दायर की, जिस पर अदालत ने जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया। 2 जून को जवाब दाखिल करने के लिए पुलिस ने समय मांगा था। पत्नी बोलीं – पासपोर्ट सरेंडर, LOC ड्रामा इसी मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया की विधायक पत्नी गनीव कौर ने कहा कि सरकार उनके खिलाफ LOC जारी कर ड्रामा कर रही है। मजीठिया ने पहले ही दूसरे मामले में अपना पासपोर्ट सरेंडर किया हुआ है। ऐसे में विदेश जाने का तो कोई सवाल ही नहीं है। वह अपने वकीलों और लीगल टीम के साथ लगातार संपर्क में हैं। इस पूरे मामले में अदालतों के माध्यम से कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए लड़ाई लड़ रहे हैं। सीएम लोगों को गुमराह करने से पीछे हटे। अब सारे मामले को 4 प्वाइंटों में जानिए – 1. निकाय चुनाव के दौरान 30 मई को मजीठा पुलिस ने अकाली दल के कार्यकर्ता जोबनप्रीत (जोबनजीत) सिंह को गिरफ्तार किया था। 2. 31 मई को सुबह लगभग 11:30 बजे मजीठिया अपने 50-60 समर्थकों की भीड़ के साथ मजीठा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। पुलिस का आरोप है कि मजीठिया और उनके समर्थकों ने जबरन थाने और पूछताछ कक्ष में घुसकर हंगामा किया, हथियार लहराए, केस फाइलें फाड़ीं। फिर आरोपी जोबनप्रीत को पुलिस हिरासत से जबरन छुड़ाने की कोशिश की। 3. इस घटना के चलते मजीठा थाने में 1 जून को बिक्रम सिंह मजीठिया पर एक और केस दर्ज किया गया। गिरफ्तारी के लिए पुलिस की 12 टीमें लगा दी गईं। छापेमारी से बचने के लिए शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। अकाली दल के वकीलों ने याचिका दायर कर कार्यकर्ता जोबनजीत की गिरफ्तारी को चुनौती दी और मजीठिया की गिरफ्तारी पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। हाईकोर्ट ने 1 जून को मामले पर पहली सुनवाई करते हुए पंजाब के DGP और अमृतसर रूरल के SSP को नोटिस जारी कर इस पूरी कार्रवाई पर जवाब तलब किया। इस बीच शाम को मजीठिया का LOC जारी कर दिया गया। 4. 2 जून को मजीठिया की याचिका पर दोबारा सुनवाई हुई। अकाली दल ने पूरी पुलिसिया कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध और मनगढ़ंत करार दिया। पंजाब सरकार की ओर से पेश वकीलों ने मजीठिया के वकीलों की दलीलों का लिखित और विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से और समय मांगा। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की इस मांग को स्वीकार करते हुए मामले को आगे बढ़ाते हुए सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए 3 जून तक का समय दिया था। ‘गुमशुदा भगोड़े की तलाश’, मजीठा में लगे पोस्टर आज मजीठा क्षेत्र में फिर जगह-जगह बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए हैं। इन पर लिखा है-“गुमशुदा भगोड़े की तलाश।” होर्डिंग में कहा गया है कि मजीठा पुलिस स्टेशन पर गुंडा तत्वों द्वारा किए गए हमले के मामले में गिरोह के मुख्य सरगना मजीठिया की पुलिस को तलाश है। यदि किसी क्षेत्रवासी के पास उनके बारे में कोई जानकारी हो तो वह तुरंत नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करे। ये पोस्टर-होर्डिंग अमृतसर देहात पुलिस द्वारा नहीं लगवाए गए हैं। सीएम बोले – मजीठिया कागजी शेर है इस मामले में सीएम भगवंत मान ने कहा कि मजीठिया कागजी शेर हैं। लोगों को आफत में डालकर खुद भूमिगत हो गए। हर समय मूंछों पर ताव देने वाले को सामने आना चाहिए। जब मीडिया ने सवाल किया कि क्या वह पुलिस थाने में घुसे थे और अमृतपाल की तरफ उन्होंने हमला किया था, इस पर उनका जवाब था कि कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
Source link
