खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सरिता देवी के लगातार औचक निरीक्षण से पानीपत जिले के समालखा शहर के किड्सजी और निजी स्कूलों में अनियमितताएं सामने आई हैं। इन निरीक्षण में कई गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल संचालित होते पाए गए, जहां साफ-सफाई, पानी, बिजली और कमरों जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव था। एक चौंकाने वाले मामले में, नारायणा गांव में एक स्कूल मंदिर परिसर में ही चलाया जा रहा था। बीईओ सरिता देवी ने नारायणा रोड, मनाना रोड और नारायणा गांव स्थित कुल सात किड्सजी व निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। अस्थायी मान्यता के दस्तावेज दिखाए सभी स्कूलों में बच्चे पढ़ाई करते मिले, लेकिन इनमें से अधिकांश के पास वैध मान्यता नहीं थी। कुछ स्कूल संचालकों ने पुराने अस्थायी मान्यता के दस्तावेज दिखाए, जिनकी वैधता वर्षों पहले समाप्त हो चुकी थी और उनका नवीनीकरण नहीं कराया गया था। निरीक्षण के दौरान, कहीं बच्चे टाट-पट्टी पर बैठे मिले, तो कहीं स्टूल-डेस्क पर। यह भी पाया गया कि सभी बच्चों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ाई जा रही थी। राजकीय स्कूल में दाखिला दर्ज नहीं बीईओ ने बताया कि मनाना रोड पर स्थित एक स्कूल के बच्चों का किसी भी सरकारी या राजकीय स्कूल में दाखिला दर्ज नहीं था। एमआईएस पोर्टल पर एंट्री के बिना इन बच्चों को कोई प्रमाणपत्र नहीं मिल सकता, जिससे शिक्षा विभाग के पास उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने यह भी जानकारी दी, कि कई स्कूल संचालक दूसरे स्कूलों के पोर्टल पर बच्चों का फर्जी दाखिला करा रहे हैं। नारायणा गांव में एक स्कूल मंदिर में चल रहा था, जबकि एक अन्य स्कूल ने अपना पुराना नाम बदलकर नए नाम से संचालन शुरू कर दिया था। बीईओ ने एसडीएम को भेजी स्कूलों की सूची सरिता देवी ने कहा कि गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची समालखा के एसडीएम को भेज दी गई है। इन सभी स्कूलों को एक सप्ताह का नोटिस दिया जाएगा, जिसके बाद मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की सहायता से उन्हें सील कर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी स्कूलों को केवल एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ानी होंगी। निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें नहीं चलेंगी, क्योंकि आम आदमी पर इसका अनावश्यक बोझ पड़ता है और शिक्षा सभी के लिए आवश्यक है।
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