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पानीपत में दो महिला कारोबारी भगोड़ा घोषित:चेक बाउंस के अलग-अलग मामलों में कोर्ट ने लिया एक्शन, एक है मुंबई की




पानीपत की न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (JMFC) अनुराधा-1 की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की है। अदालत ने लगातार बुलावों के बावजूद अनुपस्थित रहने पर दो महिला कारोबारियों मुंबई निवासी पर्ल रहेजा और पानीपत निवासी मासम देवी को भगोड़ा घोषित कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित थाना प्रभारियों को दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 209 के तहत नई FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई अमल में लाने के कड़े निर्देश दिए हैं। पहला मामला: मैसर्स अंजलि होम बनाम मैसर्स बेड कुट्यूर अदालती आदेश के अनुसार, शिकायतकर्ता मैसर्स अंजलि होम के अधिवक्ता रमेश गुप्ता कोर्ट में उपस्थित हुए। आरोपी महिला पर्ल रहेजा (पत्नी बंसी रहेजा, प्रोपराइटर/अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता – मैसर्स बेड कुट्यूर, निवासी चेंबूर ईस्ट, मुंबई) के खिलाफ 5 मार्च 2026 को उद्घोषणा की प्रक्रिया शुरू की गई थी। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 84) के तहत 30 दिनों की अनिवार्य समय सीमा बीत जाने और 15 जून को तामिलकर्ता के बयान दर्ज होने के बाद भी आरोपी 15 जुलाई 2026 को कोर्ट में पेश नहीं हुई। बार-बार आवाज लगाने के बाद भी अनुपस्थित रहने पर कोर्ट ने पर्ल रहेजा को भगोड़ा घोषित कर दिया। दूसरा मामला: मनजीत बनाम मासम देवी (मैसर्स यूरो डेको एंटरप्राइज) दूसरे मामले में शिकायतकर्ता मनजीत के अधिवक्ता दीपक सहरावत पेश हुए। आरोपी महिला मासम देवी (पत्नी दीपक पूनिया, प्रोपराइटर – मैसर्स यूरो डेको एंटरप्राइज, निवासी मुखीजा कॉलोनी, पानीपत व दुकान – न्यू यार्न मार्केट, गंगापुरी रोड, पानीपत) के खिलाफ 1 मार्च 2026 को उद्घोषणा प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस मामले में भी अनिवार्य समय अवधि बीत जाने के बाद आरोपी महिला के अदालत में उपस्थित न होने पर कोर्ट ने माना कि वह जानबूझकर फरार है। अदालत ने मासम देवी को भी विधिवत ‘उद्घोषित अपराधी’ घोषित कर दिया। 25 नवंबर 2026 को होगी अगली सुनवाई दोनों ही मामलों में अदालत ने संबंधित प्रभारियों को सूचना भेजकर धारा 209 (BNS) के तहत केस दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने दोनों मामलों की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 तय की है, जिस दिन शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से आरोपियों की संपत्तियों की सूची सौंपी जाएगी और धारा 299 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत साक्ष्य दर्ज करने पर विचार किया जाएगा।



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