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भिवानी के गांव धनाना में वीरवार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाली बेटियों साक्षी चौधरी व प्रिया घनघस के स्वागत में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। साक्षी चौधरी और प्रिया घणघस जैसे ही अपने पैतृक गांव धनाना में पहुंची तो पूरा गांव उनके स्वागत में उमड़ पड़ा। दोनों बेटियों का गांव में विजयी जुलूस निकाला, विजयी जुलूस में भारी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। लोगों ने रंग-गुलाल उड़ाकर और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी मनाई। इस दौरान ग्रामीणों ने खिलाड़ियों पर पुष्प वर्षा की। वहीं साक्षी चौधरी और प्रिया घनघस ने अपनी उपलब्धि को राष्ट्र के नाम किया। फूल मालाओं से किया स्वागत, पैसे दिए गांव के सर्व जातीय जाटू खाप के चबूतरे पर आयोजित सम्मान समारोह में अनेक सामाजिक संस्थाओं और गणमान्य नागरिकों ने स्वर्ण पदक विजेता बेटियों को नगद राशि भेंट कर और फूल मालाओं से सम्मान किया गया। गांव में देशी घी के लड्डू और जलेबी खिलाई। सम्मान समारोह में बवानीखेड़ा के विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि ने कहा कि धनाना गांव की बेटी प्रिया घणघस और साक्षी चौधरी ने पूरे विश्व में अपने गांव, हल्का, जिला और देश का नाम रोशन किया है। यह बड़े गर्व की बात है। बवानीखेड़ा हल्के से गांव धनाना, मिताथल और बडेसरा से खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ में चार मेडल देश के लिए जीते हैं। सरकार निरंतर खेलों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई के साथ साथ खेलों में भाग लेने का आह्वान किया। दोनों खिलाड़ियों ने जीते गोल्ड मेडल बता दें कि स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में बॉक्सिंग में साक्षी चौधरी ने 51 किलोग्राम भारवर्ग और प्रिया घणघस ने 60 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को धूल चटाई और स्वर्ण पदक हासिल किया। गोल्ड मेडल जीतने के बाद से ही परिजनों के साथ-साथ ग्रामीण भी दोनों बेटियों के गांव में लौटने के इंतजार में थे। वीरवार को दोनों खिलाड़ी भिवानी से विजय जुलूस के साथ गांव में पहुंची, जहां गांव के लोग पूरे उत्साह, जोश और उमंग के साथ पलकें बिछाए इंतजार में थे। गांव पहुंचते ही परिजनों के अलावा ग्रामीणों ने प्रिया और साक्षी के स्वागत में जोरदार नारे लगाए। ग्रामीणों ने फूल मालाओं व पुष्प वर्षा से जोरदार स्वागत किया। प्रिया बोलीं- कड़ी मेहनत और अनुशासन जरूरी प्रिया घणघस ने कहा कि सफलता केवल कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से मिलती है। वे प्रतिदिन सुबह-शाम 3-3 घंटे अभ्यास करती हैं। प्रिया के पिता महेंद्र एक जमींदार (किसान) हैं, जबकि उनकी माता मीरा गृहिणी हैं। प्रिया ने कहा कि उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। उनके बड़े भाई नीरज अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर हैं और बहन नीरू पढ़ाई कर रही हैं। फाइट से पहले भाई से करती हैं बात प्रिया का कहना है कि उनकी हर फाइट से पहले वह अपने बड़े भाई नीरज से जरूर बात करती हैं और उनकी सलाह उन्हें आत्मविश्वास देती है। प्रिया ने वर्ष 2015-16 में मुक्केबाजी की शुरुआत की। बचपन में भाई-बहनों के बीच अक्सर लड़ाई-झगड़ा होता था, जिसके चलते परिवार ने उन्हें बॉक्सिंग अकादमी भेज दिया। वहीं से उनके खेल जीवन की शुरुआत हुई और आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 2023 में जीता था कांस्य पदक प्रिया ने वर्ष 2023 में कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित यूथ एवं जूनियर एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक, चीन में आयोजित मल्टीनेशनल यूथ ट्रेनिंग कैंप में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2025 में थाईलैंड ओपन टूर्नामेंट में कांस्य तथा बैंकॉक में आयोजित अंडर-22 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम किया। प्रिया घणघस ने अनेक पदक देश की झोली में डालें हैं। वर्ष 2026 प्रिया के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। उन्होंने स्पेन में आयोजित बॉक्सिंग कप में स्वर्ण पदक, चेक गणराज्य में आयोजित ग्रैंड प्रिक्स टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक, मंगोलिया में आयोजित सीनियर एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में उन्होंने कनाडा की खिलाड़ी को 4-1 के अंतर से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे भारत, उनके परिवार और विशेष रूप से उनके बड़े भाई के सहयोग का परिणाम है। किसान परिवार से है साक्षी चौधरी साक्षी चौधरी किसान परिवार में पली बढ़ी है। साक्षी के पिता मनोज कुमार किसान हैं, जबकि माता शीला गृहिणी हैं। उनके बड़े भाई भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर कार्यरत हैं। साक्षी का कहना है कि परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें हर चुनौती का सामना करने का आत्मविश्वास दिया और सफलता की राह आसान बनाई। अपने खेल के शानदार सफलता के सफर में साक्षी ने वर्ष 2017 में आयोजित यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2025 में इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा उसी वर्ष कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद वर्ष 2026 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। हर उपलब्धि के पीछे वर्षों की मेहनत साक्षी ने कहा कि उनकी सफलता के पीछे उनके माता-पिता, भाई, कोच और पूरे परिवार का सबसे बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि हर उपलब्धि के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण छिपा होता है। साक्षी ने कहा कि नशा जीवन और खेल दोनों का सबसे बड़ा दुश्मन है। यदि युवा अपने जीवन में सफलता हासिल करना चाहते हैं तो उन्हें नशे से दूर रहकर खेलों और सकारात्मक गतिविधियों से जुडऩा चाहिए। स्वस्थ शरीर और मजबूत इरादे ही सफलता की असली पहचान हैं। सम्मान समारोह में सांसद धर्मवीर सिंह के सुपुत्र मोहित चौधरी, पूर्व आईजी राजपाल सिंह, जुलाना के पूर्व विधायक अमरजीत ढांडा, दलीप सिंह चेयरमैन धनाना, जाटू खाप प्रधान भीम सिंह मिताथल, कोच जगदीश सिंह, जिला खेल अधिकारी विद्यानंद यादव, भिवानी बॉक्सिंग क्लब प्रधान कमल सिंह, रामदेव तायल आदि मौजूद रहे।
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