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उकलाना नगर पालिका उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर सियासी हलचल बढ़ी:16 पार्षदों पर निगाहें, कांग्रेस-भाजपा में देर रात तक रणनीति, सर्वसम्मति बनाने की कवायद तेज




हिसार जिले के उकलाना नगर पालिका में उपाध्यक्ष (वाइस चेयरमैन) पद के लिए 7 अगस्त को होने वाले चुनाव से पहले नगर की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। नगर पालिका की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पूरे दिन राजनीतिक बैठकों, रणनीतिक चर्चाओं और जोड़-तोड़ की अटकलों का दौर चलता रहा, जबकि देर रात तक दोनों दलों में उम्मीदवार तय करने को लेकर मंथन जारी रहने की संभावना है। नगर पालिका के 16 पार्षद इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे और इन्हीं के फैसले से तय होगा कि उपाध्यक्ष की कुर्सी किसके हिस्से में जाएगी। ऐसे में सभी की निगाहें पार्षदों की गतिविधियों और राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई हैं। कांग्रेस की नजर नगरपालिका में मजबूत पकड़ पर चेयरपर्सन चुनाव में मिली जीत से उत्साहित कांग्रेस अब उपाध्यक्ष पद पर भी अपना उम्मीदवार जिताकर नगर पालिका में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। विधायक नरेश सेलवाल लगातार पार्टी नेताओं और पार्षदों के संपर्क में हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस पार्षदों की एक महत्वपूर्ण बैठक किसी गोपनीय स्थान पर आयोजित किए जाने की तैयारी है, जिसमें अंतिम रणनीति और उम्मीदवार के नाम पर फैसला लिया जाएगा। चर्चा यह भी है कि यदि किसी एक नाम पर सर्वसम्मति नहीं बनती है तो उम्मीदवार के चयन के लिए लॉटरी प्रणाली अपनाने जैसे विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि पार्टी का प्रयास सभी पार्षदों को एकमत कर एक ही उम्मीदवार मैदान में उतारने का है। भाजपा भी जीत के लिए बना रही रणनीति दूसरी तरफ भाजपा भी चेयरपर्सन चुनाव में मिली हार की भरपाई उपाध्यक्ष पद जीतकर करना चाहती है। इसके लिए पूर्व चेयरमैन श्रीनिवास गोयल, पूर्व राज्य मंत्री अनूप धानक और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. आशा रानी खेदड़ संगठनात्मक स्तर पर लगातार मंथन कर रहे हैं। पार्टी नेताओं की पार्षदों के साथ लगातार बैठकों का दौर जारी है और समर्थन जुटाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के लिए यह मुकाबला चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन अंतिम समय तक राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उम्मीदवार चयन सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी परीक्षा अपने-अपने खेमे में एक नाम पर सहमति बनाना है। यदि उम्मीदवार चयन को लेकर अंदरूनी मतभेद सामने आते हैं तो मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है। ऐसे में पार्षदों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। बैठक के लिए 9 पार्षदों की उपस्थिति अनिवार्य उकलाना नगर पालिका में कुल 16 पार्षद हैं। उपाध्यक्ष चुनाव के लिए आयोजित होने वाली बैठक की वैधानिक कार्यवाही शुरू करने के लिए कम से कम 9 पार्षदों की उपस्थिति (कोरम) आवश्यक है। यदि बैठक में 9 से कम पार्षद मौजूद रहते हैं तो बैठक की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकेगी। ऐसे में चुनाव से पहले दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने-अपने समर्थक पार्षदों को एकजुट रखते हुए कोरम सुनिश्चित करना भी है। फिलहाल उकलाना की राजनीति में यह रात बेहद अहम मानी जा रही है। शहर की निगाहें शुक्रवार को होने वाले उपाध्यक्ष चुनाव पर टिकी हैं, जहां कुछ ही घंटों बाद यह साफ हो जाएगा कि नगर पालिका की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण कुर्सी पर किस दल का कब्जा होगा और स्थानीय राजनीति का अगला समीकरण क्या होगा।



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