हरियाणा के पंचकूला में कोर्ट ने साल 2023 के एक सड़क हादसे में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल दुर्घटना होने भर से ड्राइवर की लापरवाही या तेज रफ्तार साबित नहीं की जा सकती। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आज के दौर में ट्रैफिक बढ़ने के कारण सड़क हादसे आम हो गए हैं, लेकिन हर हादसे को लापरवाही का नतीजा मान लेना सही नहीं है। अभियोजन पक्ष आरोपी की कथित लापरवाही या लापरवाह ड्राइविंग को ठोस रूप से साबित करने में नाकाम रहा। बाइक सवार की हुई थी मौत यह मामला 31 जनवरी 2023 का है। चंडीमंदिर के पास फ्लायओवर के नजदीक सुबह करीब 10:30 बजे हुए हादसे में ध्रुव राणा नामक युवक की मौत हो गई थी। वह दोपहिया वाहन पर सवार था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और 304-ए (लापरवाही से मौत) के तहत केस दर्ज किया था। गवाहों के बयान कमजोर पड़े मामले में अभियोजन ने 9 गवाह पेश किए, लेकिन कोई भी गवाह घटना को स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर पाया। मृतक के चाचा राज कुमार, जिन्हें पहले मुख्य गवाह बताया गया था, जिरह के दौरान अपने बयान से मुकर गए। उन्होंने बताया कि उन्हें हादसे की सूचना एक अज्ञात व्यक्ति से फोन पर मिली थी और उन्होंने खुद घटना नहीं देखी थी। जांच में भी खामियां जांच अधिकारी ने भी माना कि मौके पर कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया गया। जबकि घटना सार्वजनिक स्थान पर हुई थी। कोर्ट ने इसे जांच की बड़ी कमी माना। इसके अलावा आरोपी की पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) भी नहीं करवाई गई। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र गवाहों को शामिल करना जांच अधिकारी की जिम्मेदारी होती है। ऐसा न करना अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा करता है। साथ ही टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेडTIP न होने से आरोपी की पहचान भी पुख्ता नहीं हो सकी। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को “संदेह से परे” साबित करने में विफल रहा है। इसी आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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पंचकूला कोर्ट का एक्सीडेंट केस में फैसला:हादसे से ही लापरवाही साबित नहीं होती, पुलिस ने नहीं करवाई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड
