पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नीति आयोग की बैठक में राज्य के लंबे समय से लंबित मुद्दों को उठाया। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों के विकास के लिए विशेष पैकेज, पंजाब को स्पेशल कैटेगरी स्टेटस देने और केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता की मांग की। मान ने कहा कि पाकिस्तान से लगती 553 किलोमीटर लंबी सीमा के कारण पंजाब को सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए राज्य विशेष सहयोग का हकदार है। ड्रोन से तस्करी का सबसे अधिक असर पड़ रहा है मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के लंबे समय से लंबित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से लगती 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण पंजाब को सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष पैकेज देने और पहाड़ी व उत्तर-पूर्वी राज्यों की तर्ज पर पंजाब को भी 90:10 फंडिंग के साथ स्पेशल कैटेगरी स्टेटस देने की मांग की। मान ने कहा कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद और किसानों की समस्याओं का सबसे अधिक असर पंजाब पर पड़ता है। पंजाब को नहीं मिला मिलता अपेक्षित सहयोग मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बावजूद पंजाब देश की सुरक्षा में ढाल बनकर खड़ा है, लेकिन केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने बताया कि 2025 की बाढ़ से राज्य के 2,300 से अधिक गांव प्रभावित हुए और हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मान ने केंद्र सरकार से पंजाब की लंबे समय से लंबित मांगों को स्वीकार करने की अपील करते हुए कहा कि सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल पंजाब ही ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। ड्रोन जैसर्स की रखी मांग मुख्यंत्री ने चिंता जताई कि पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित 2,000 से अधिक गांवों में से केवल 107 गांवों को ही ‘वाइब्रेंट विलेज-II’ योजना के तहत कवर किया गया है। सीमा पार से होने वाली ड्रोन तस्करी और सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए पंजाब ने अतिरिक्त ड्रोन जैमर्स और अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, गुरदासपुर, फाजिल्का और पठानकोट जैसे सीमावर्ती जिलों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट मांगी। है।
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