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किशाऊ बांध विवाद खत्म, हिमाचल को राहत:हरियाणा-दिल्ली-राजस्थान उठाएंगे बिजली कंपोनेंट खर्च; शाह के साथ मीटिंग में बनी सहमति




किशाऊ बांध परियोजना को लेकर पिछले 8 वर्षों से चला आ रहा वित्तीय विवाद अब खत्म हो गया है। केंद्र सरकार की पहल और हिमाचल सरकार की पैरवी के बाद परियोजना के बिजली कंपोनेंट पर आने वाली करीब 2 हजार करोड़ रुपए की लागत को अब लाभान्वित राज्य वहन करेंगे। इससे हिमाचल पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज (मंगललार को) नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय मीटिंग में सीएम सुक्खू ने हिमाचल के हितों को मजबूती से रखा। इसमें भारत सरकार ने किशाऊ बांध परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले राज्यों दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा द्वारा हिमाचल के हिस्से के बिजली कंपोनेंट की लागत वहन करने पर सैद्धांतिक सहमति दी। यानी जिन राज्यों को किशाऊ बांध से पानी मिलना है, वहीं राज्य हिमाचल के बिजली कंपोनेंट का खर्च उठाएंगे। हिमाचल को बिजली से 600 करोड़ सालाना का फायदा: CM बता दें कि करीब 15 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से प्रस्तावित 422 मेगावाट क्षमता की यह परियोजना टौंस नदी पर हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित है। परियोजना के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश को बिजली हिस्सेदारी के तौर पर हर साल करीब 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। CM सुक्खू ने दावा किया कि इससे करीब 600 करोड़ रुपए सालाना की हिमाचल को आय होगी। परियोजना प्रभावित हिमाचल पर वित्तीय बोझ डालना गलत: सुक्खू मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि परियोजना से विस्थापन का सबसे अधिक असर हिमाचल प्रदेश पर पड़ेगा। ऐसे में राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में हिमाचल के योगदान को देखते हुए राज्य के हितों की रक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने परियोजना के लिए हिमाचल के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित संसाधनों को देखते हुए इसे स्वीकार नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है तो विद्युत घटक में भी इसी तरह की सहायता मिलनी चाहिए थी। सीएम ने हिमाचल के अधिकारों की जीत बताया मुख्यमंत्री ने इसे हिमाचल के अधिकारों की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बिजली परियोजनाओं में राज्य के वैध अधिकार, लंबित बकाया राशि और अन्य हितों की लड़ाई लगातार जारी रखेगी। बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री, विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, हिमाचल के मुख्य सचिव केके पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी मौजूद रहे।



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