पानीपत जिले के इसराना उपमंडल में गोवंश का बुरा हाल है। सरकार द्वारा गो सेवा आयोग बनने और करोड़ों रुपए की ग्रांट मिलने के बावजूद, आवारा पशु सड़कों पर प्लास्टिक खाने को मजबूर हैं। क्षेत्र में लगभग 9 गोशालाएं होने के बावजूद यह स्थिति बनी हुई है। खण्ड इसराना और मतलौड़ा में सड़कों पर घूमते ये पशु भूख के कारण प्लास्टिक की पन्नियां और अन्य कूड़ा खाने को विवश हैं। गोशालाओं में इन्हें पहुंचाने के लिए न तो स्थानीय लोग तैयार हैं और न ही गोशालाएं इन्हें पकड़ने का प्रयास करती हैं। रात के समय सड़कों पर बैठे रहने के कारण ये अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। पंचायत मंत्री ने दी थी सहायता राशि हरियाणा के पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने हाल ही में अप्रैल में इसराना उपमंडल की 9 गोशालाओं को 1 करोड़ 46 लाख 26 हजार 860 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की थी। यह राशि गोवंश के रखरखाव, चारा, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए दी गई थी। उस समय मंत्री ने कहा था कि इस सहायता से गोशालाओं में व्यवस्थाएं मजबूत होगी और सड़कों पर घूम रहे गोवंश को आश्रय मिल सकेगा। जमीनी हकीकत बिलकुल उलट हालांकि, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ग्रामीण कृष्ण आर्य, मनजीत, देव, कुलदीप, विजय, चरण सिंह, राज सिंह, राजेश, नीरज सहित अन्य लोगों ने बताया कि इसराना, नौल्था, मांड़ी, शाहपुर, कुराना, उरलाना, मतलौड़ा और धर्मगढ़ जैसी कई गोशालाएं होने के बावजूद शाम के समय पशु दुकानों और घरों के बाहर पानी के बर्तनों से प्यास बुझाते नजर आते हैं। सड़क हादसों का हो रहे शिकार ग्रामीणों का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के अलावा लिंक सड़कों पर भी गोवंश का जमावड़ा देखा जा सकता है, जो अक्सर सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनता है। गो सेवा के दावों और जमीनी हकीकत में काफी बड़ा अंतर है। गो सेवा इसराना के ब्लॉक प्रधान संदीप डोंगर ने प्रशासन से मांग की है कि गोशालाओं की सेवा व्यवस्था का निरीक्षण किया जाए। गोवंशों को सुरक्षित स्थान देने की मांग उन्होंने यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि सहायता राशि का उपयोग गोवंश के हित में हो रहा है या नहीं। उनकी मांग है कि सड़कों पर घूम रहे गोवंश को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए, चारे और पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जाए तथा दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाए।
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करोड़ों की ग्रांट के बाद भी सड़कों पर गोवंश:पॉलिथिन खाने को मजबूर; इसराना में गोशालाओं की व्यवस्था पर उठे सवाल
