करनाल में 155.21 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की। सुबह करीब पांच बजे सेक्टर-13 स्थित एक कारोबारी के घर और लक्कड़ मार्केट में कार्यालय पर छापेमारी की गई। टीम ने कई घंटों तक दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। कार्रवाई की सूचना मिलते ही शहर में हलचल मच गई और पूरे दिन चर्चा का माहौल बना रहा। सुबह 5 बजे पहुंची टीम, कई घंटों तक चली जांच
प्रवर्तन निदेशालय की चंडीगढ़ जोनल यूनिट की टीम मंगलवार सुबह करीब पांच बजे सेक्टर-13 स्थित लकड़ कारोबारी अशोक मित्तल के आवास और लक्कड़ मार्केट स्थित उनके कार्यालय पहुंची। टीम के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने परिसर में प्रवेश कर बैंकिंग दस्तावेज, कंपनी रिकॉर्ड और अन्य जरूरी कागजातों की गहन जांच शुरू की, जो कई घंटों तक चली। महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा मामला
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला बैंकिंग प्रणाली में हेरफेर और विदेशी लेन-देन से जुड़ा हुआ है। इस केस में अशोक मित्तल के अलावा सौरभ ढींगरा, भारत भूषण मित्तल, रमन सिंघल और अन्य संबंधित लोग भी जांच के दायरे में हैं। हरियाणा, दिल्ली और गोवा में 11 ठिकानों पर रेड
ईडी ने केवल करनाल ही नहीं बल्कि हरियाणा, दिल्ली और गोवा में कुल 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के मुताबिक यह सभी स्थान महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े व्यक्तियों और उनके कारोबारी नेटवर्क से संबंधित हैं। इस कार्रवाई को एक बड़े नेटवर्क की जांच के तौर पर देखा जा रहा है। बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल और हार्ड डिस्क खंगाले
सूत्रों के अनुसार करनाल स्थित परिसरों में बैंकिंग रिकॉर्ड, कंपनी दस्तावेज, संपत्तियों का ब्यौरा, डिजिटल डेटा, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन की जांच की गई। अधिकारियों ने वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में भी लिए हैं। अब इन सभी साक्ष्यों का विस्तार से विश्लेषण किया जाएगा। सीबीआई की एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच
यह पूरा मामला सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के बाद सामने आया था। सीबीआई ने महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उसी आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की। विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट में हेरफेर का आरोप
जांच एजेंसियों का आरोप है कि कंपनी से जुड़े लोगों ने बैंकिंग प्रणाली में गड़बड़ी कर विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट में अनधिकृत बदलाव करवाए। ये बदलाव बैंक के स्विफ्ट सिस्टम के माध्यम से किए गए, लेकिन बैंक के कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म फिनेकल में उनकी सही एंट्री नहीं की गई। इससे बैंक रिकॉर्ड में बड़ा अंतर पैदा हुआ। बैंकों को 155.21 करोड़ का नुकसान
ईडी के अनुसार इस कथित हेरफेर के जरिए लेटर ऑफ क्रेडिट की सीमा बढ़ाई गई, जिससे तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और अन्य बैंकों के कंसोर्टियम को करीब 155.21 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जांच में यह भी सामने आया है कि इस रकम को अलग-अलग खातों, कंपनियों और संपत्तियों में स्थानांतरित किया गया हो सकता है। फोरेंसिक जांच होगी, आगे कार्रवाई संभव
तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का अब फोरेंसिक विश्लेषण कराया जाएगा। अगर जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों से पूछताछ, संपत्ति जब्ती और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। एजेंसी अब पूरे वित्तीय नेटवर्क को समझने में जुटी है। पुराना जीएसटी मामला भी फिर चर्चा में
मंगलवार की कार्रवाई के बाद अशोक मित्तल एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गए हैं। इसके साथ ही करीब दो साल पहले सामने आए 134 करोड़ रुपये के कथित जीएसटी चोरी मामले की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। उस मामले में भी उनकी गिरफ्तारी हुई थी और वे कुछ समय तक जेल में रहे थे। पंचकूला से गिरफ्तारी, बाद में मिली जमानत
जानकारी के अनुसार जीएसटी चोरी मामले में कार्रवाई के दौरान अशोक मित्तल को पंचकूला से गिरफ्तार किया गया था। बाद में वे कई महीनों तक जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए। शिकायतकर्ता अनिल अरोड़ा का दावा है कि उस मामले में जीएसटी बकाया की रिकवरी के लिए उनकी संपत्तियों को भी नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया था। नीलामी में रिश्तेदार ने खरीदा मकान
आरोप है कि सेक्टर-13 स्थित जिस मकान की नीलामी हुई थी, उसे सौरभ ढींगरा ने करीब 1.89 करोड़ रुपये में खरीदा था। यह मामला उस समय भी शहर में काफी चर्चा में रहा था और अब एक बार फिर सामने आने से लोगों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बाजारों में भी हलचल, दुकानों पर पहुंचे अधिकारी
मंगलवार को हुई कार्रवाई के दौरान करनाल के व्यापारिक क्षेत्रों में भी हलचल देखने को मिली। शिकायतकर्ता अनिल अरोड़ा का दावा है कि जांच एजेंसियों के अधिकारी कर्ण गेट मार्केट और सराफा बाजार में स्थित कुछ दुकानों तक भी पहुंचे थे। सूचना मिलते ही संबंधित दुकानदार दुकानें बंद कर वहां से चले गए। कारोबारी नेटवर्क पर एजेंसियों का फोकस
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां अब केवल बैंक घोटाले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उससे जुड़े पूरे कारोबारी नेटवर्क, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रही हैं। करनाल के अलावा अन्य राज्यों में मौजूद संपर्कों और निवेश की भी पड़ताल की जा रही है। शहर में दिनभर चर्चा का माहौल
सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई की सूचना फैलते ही आसपास के क्षेत्रों में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। दिनभर बाजारों और व्यापारिक हलकों में इस छापेमारी को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। आने वाले दिनों में जांच के नए खुलासों पर सबकी नजर बनी हुई है।
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करनाल में 155 करोड़ के घोटाले में ईडी की रेड:लकड़ कारोबारी अशोक मित्तल के घर-ऑफिस पर छापेमारी,महेश टिंबर केस में हरियाणा, दिल्ली और गोवा के 11 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
