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करनाल में करोड़ों की जमीन पर फर्जी जीपीए का खेल:तहसील रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप, हाथ से जोड़ा खेवट नंबर; 5 नामजद समेत अन्य पर धोखाधड़ी का केस




करनाल में करोड़ों रुपये की जमीन के कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। मॉडल टाउन निवासी एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि सीमित जमीन के लिए दी गई जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) में बाद में कथित तौर पर हाथ से नया खेवट नंबर जोड़ दिया गया। इसी आधार पर करोड़ों रुपये की संयुक्त पैतृक जमीन का फर्जी बैनामा तैयार कर उसे बेच दिया गया। शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने पांच नामजद समेत अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच अब सीआईए-3 को सौंप दी गई है। 2019 में दी थी सीमित जमीन की जीपीए, 2026 में खुला फर्जीवाड़े का दावा मॉडल टाउन निवासी सुरेंद्र राजपाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 29 मार्च 2019 को उन्होंने गांव कैलाश की 2 कनाल 18 मरले और गांव मंगलपुर की 2 कनाल 10 मरले जमीन के संबंध में चरण सिंह और सुशील कुमार के पक्ष में जीपीए पंजीकृत करवाई थी। यह अधिकार केवल उक्त जमीन तक सीमित था। शिकायतकर्ता के अनुसार, 11 जुलाई 2026 को दीवानी अदालत से समन मिलने पर उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई। अदालत के रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि चरण सिंह ने खुद को उनका जीपीए धारक बताते हुए 25 अक्टूबर 2024 को गांव मंगलपुर के खेवट नंबर-264 में स्थित करीब 700 वर्ग गज जमीन का बैनामा नरेंद्र कुमार और खेमचंद के नाम करा दिया। जिस जमीन की जीपीए दी ही नहीं, उसका कर दिया बैनामा सुरेंद्र राजपाल का कहना है कि खेवट नंबर-264 की जमीन के लिए उन्होंने कभी किसी को जीपीए नहीं दी। यह जमीन उनके और उनके भाइयों की संयुक्त संपत्ति थी, जहां पहले फैक्टरी संचालित होती थी और जिस पर बैंक का ऋण भी था। ऐसे में उस जमीन को जीपीए के माध्यम से बेचने का सवाल ही नहीं उठता। हाथ से जोड़ा गया खेवट नंबर, यहीं से खुला पूरा मामला शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने तहसील से जीपीए की प्रमाणित प्रति निकलवाई तो उसमें मूल दस्तावेज के बाद हाथ से एक अतिरिक्त खेवट नंबर जोड़ा हुआ मिला। उनका दावा है कि यह न तो उनकी लिखावट है और न ही उनकी सहमति से ऐसा किया गया। इसी कथित छेड़छाड़ के आधार पर फर्जी बैनामा तैयार किया गया। पहले ही रॉयल इन्फ्रा को बेच चुके थे जमीन शिकायत में बताया गया है कि वर्ष 2025 में वह और उनके भाई इसी जमीन में अपने हिस्से की 3 कनाल 16 मरले भूमि विधिवत रजिस्ट्री के माध्यम से मैसर्ज रॉयल इन्फ्रा, करनाल को बेच चुके थे। इसका इंतकाल भी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। आरोप है कि फर्जी बैनामे को लंबे समय तक राजस्व अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया, ताकि कथित फर्जीवाड़े का खुलासा न हो सके। पांच नामजद समेत अन्य के खिलाफ केस पुलिस ने शिकायत के आधार पर अमरजीत कौर, चरण सिंह, सुशील कुमार, रमेश चौधरी, नरेंद्र कुमार तथा अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की समकक्ष धाराओं (पूर्व आईपीसी की धारा 406, 420, 467, 468, 471 और 120-बी से संबंधित आरोप) के तहत मामला दर्ज किया है। सीआईए-3 करेगी पूरे नेटवर्क की जांच शुरुआत में मामले की जांच सेक्टर-13 चौकी को सौंपी गई थी, लेकिन अब जांच सीआईए-3 को स्थानांतरित कर दी गई है। पुलिस जीपीए, बैनामे, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की फोरेंसिक और रिकॉर्ड स्तर पर जांच करेगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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