यमुनानगर में प्रमोशन और ट्रांसफर का झांसा देकर NHAI के कर्मचारी से लाखों रुपये ठग लिए गए। आरोप है कि खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों का करीबी बताने वाले गिरोह ने सरकारी संपर्कों का डर और भरोसा दिखाक
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फर्जी लेटरहेड, नकली दस्तावेज और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए विश्वास जीतकर आरोपियों ने करीब 20.50 लाख रुपये ऐंठ लिए। इतना ही नहीं, जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे तो उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। मामले में जगाधारी सदर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता निर्मल कुमार निवासी ग्राम भोजपुर ने बताया कि 16 फरवरी 2025 तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), नई दिल्ली में कार्यरत था। विभाग में प्रमोशन को लेकर उसका मामला दिल्ली कैंट में लंबित था, जिस कारण वह मानसिक रूप से परेशान था।
राजमार्ग मंत्रायल के सचिव काे बताया जानकार
इसी दौरान उसकी मुलाकात यमुनानगर में अनिल बजरंगी से हुई, जिसने उसे भरोसा दिलाया कि उसके जानकार लोग उसके प्रमोशन और ट्रांसफर दिल्ली से अंबाला करवा सकते हैं। 6 जनवरी 2025 को अनिल बजरंगी ने उसकी मुलाकात पंचकूला के रेड बिशप होटल में मनोज सिंधी और कर्नल मान से करवाई।
दोनों ने खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों का करीबी बताते हुए प्रमोशन और ट्रांसफर करवाने के बदले 15 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने पहले 5 लाख रुपये दिए, जिनमें से कुछ रकम अनिल बजरंगी के माध्यम से और कुछ सीधे मनोज सिंधी व कर्नल मान को दी गई।
बाद में 20 जनवरी 2025 को पानीपत टोल प्लाजा के पास और 21 जनवरी को दिल्ली में उनसे मुलाकात हुई, जहां मोहन झा उर्फ महाराज से भी मिलवाया गया। आरोपियों ने दावा किया कि मोहन झा की सीधी पहुंच सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सचिव उमा शंकर तक है। 22 जनवरी को शिकायतकर्ता को मंत्रालय में ले जाकर एंट्री पास भी बनवाया गया, जिसके बाद उससे और पैसों की मांग की गई।
सचिव उमा शंकर के नाम लिखवाए पत्र
शिकायतकर्ता के अनुसार, 23 जनवरी को मनोज सिंधी ने उससे 5 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए। इसके बाद आरोपियों ने उससे सचिव उमा शंकर के नाम पर कुछ पत्र भी लिखवाए और भरोसा दिलाया कि उसके आधार पर उसका प्रमोशन DGM Tech के पद पर करवा दिया जाएगा। इसके बाद लगातार व्हाट्सएप और कॉल के जरिए उससे और पैसे मांगे जाते रहे।
10 फरवरी 2025 को मनोज सिंधी ने अपने बैंक खाते में 2 लाख रुपये और जमा करवाए। इस तरह शिकायतकर्ता ने नकद और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से कुल 20 लाख 50 हजार रुपये आरोपियों को दे दिए। इसी बीच 14 फरवरी 2025 को उसे विभाग से सेवा निवृत्त कर दिया गया, जिसकी जानकारी उसने आरोपियों को दी।
जांच में सभी दस्तावेज निकले फर्जी
आरोप है कि इसके बावजूद आरोपियों ने झूठे आश्वासन दिए और फर्जी ऑडियो, व्हाट्सएप मैसेज तथा दस्तावेज भेजते रहे। बाद में उन्होंने शांति कांता दास IAS के नाम पर भी फर्जी पत्र भेजा और 14 अप्रैल 2025 को अनिल बजरंगी ने व्हाट्सएप पर एक और पत्र भेजकर कहा कि उसकी सभी विभागीय जांच खत्म हो गई हैं और वह 15 अप्रैल को ड्यूटी ज्वाइन कर सकता है, लेकिन इसके बदले 11 लाख रुपये और मांगे गए।
निर्मल कुमान ने बताया कि जब उसने ने विभाग में जांच की तो पता चला कि ऐसा कोई आदेश या फाइल मौजूद नहीं है, जिससे स्पष्ट हुआ कि सभी दस्तावेज फर्जी थे। जब उसने अपने पैसे वापस मांगे तो मनोज सिंधी, कर्नल मान और मोहन झा ने उसे और उसके परिवार को जान से मारने तथा झूठे केस में फंसाने की धमकियां देनी शुरू कर दीं। पुलिस ने मनोज सिंधी, मोहन झा और कर्नल माल के खिलापु केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।






