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हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले 50 वर्षीय पवन कुमार इन दिनों बेहद तनाव से गुजर रहे हैं। कारण है सरकारी सिस्टम, जिसमें उसे जिंदा होते हुए भी मृत दिखा दिया गयस है और उनकी पत्नी को विधवा। मामले का खुलासा तब हुआ, जब उन्होंने बेटी की शादी के लिए मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना के तहत आवेदन किया। आवेदन खारिज होने पर उन्होंने विभाग से संपर्क किया तो पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मौत हो चुकी है। इसी कारण उनकी बेटी के विवाह अनुदान का आवेदन भी रद्द कर दिया गया। फिर क्या था, पवन ने झोला उठाया और अफसरों की चौखट पर पहुंच गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब वे लगातार तीन माह से सरकारी खिड़कियों पर जाकर खुद के जिंदा होने के सुबूत दे रहे हैं, लेकिन कोई मानने को तैयार ही नहीं है। पवन को इसका खामियाजा सरकारी कामकाज से लेकर सामाजिक जीवन में भी उठाना पड़ा रहा है। मृत दर्शा दिए जाने से जहां वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे है, वहीं 12 जून को उनकी शादी की 31वीे सालगिरह है, लेकिन परिवार पहचान पत्र (PPP) में हुई एक गलती ने उनकी खुशियों पर ग्रहण लगा दिया है। दैनिक भास्कर एप की टीम ने जब पवन से इस बारे में बात की तो उनकी आंखें नम हो गईं। कहना है कि उसके पास सारे सुबूत है, लेकिन हर बार उन्हें दस्तावेजों की जांच और सुधार की प्रक्रिया में उलझा दिया जाता है। पहले जानिए कौन हैं पवन कुमार, जिन्हें मृत दर्शाया गया सेक्टर-8 स्थित गांव मिर्जापुर निवासी पवन कुमार कपड़ों की दुकान पर सेल्समैन का काम करते है। उनका वेतन 16000 रूपये मासिक है, जिससे वो अपना घर चलाते है। परिवार में पत्नी पार्वती देवी और तीन बच्चे है। तीनों में दो बेटे हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है। शादीशुदा बेटा मैकेनिक का काम करता है और परिवार के भरण पोषण में हाथ बंटाता है। इसके अलावा उनकी एक बेटी भी है, जिसकी शादी उन्होंने इसी साल फरवरी 2026 में की है। अब जानिए कैसे जिंदा होते हुए मृत दर्शा दिए गए पवन… पवन की समस्या पर सरकारी स्तर पर क्या हुआ, 3 पॉइंट में जानिए… 1 जून को समाधान शिविर में लगाई शिकायत: पवन ने बताया कि वो एक जून को लघु सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर में पहुंचे थे। जहां पर अधिकारियों के सामने खुद को जिंदा होने की बात कही। वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने उनको फिर से खिड़की नंबर 11 पर भेज दिया। यहां पर फिर से उससे वहीं कागजात मांग लिए गए। इसके बाद वो वापस घर आ गए। 2 जून को लघु सचिवालय बुलाया गया: पवन ने बताया कि 2 जून को उनको कॉल करके लघु सचिवालय बुलाया गया। जहां पर ADC अंजलि श्रोत्रिया ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए तीनों बच्चों के 10वीं क्लास की मार्कशीट, 15 साल पुरा राशन कार्ड, दोनों पति-पत्नी के वोटर कार्ड जमा कराए। विधवा का स्टेटस बदला, लेकिन नाम ऐड नहीं: पवन कुमार ने बताया कि 4 जून को उनके पास एडीसी ऑफिस से कॉल आया कि हमने आपकी पत्नी के विधवा का स्टेटस हटा दिया है। किसी भी सीएससी सेंटर से आप अपना नाम ऐड करा सकते है। जब वह सीएससी सेंटर पर पहुंचे तो उनका नाम ऐड नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने वापस कॉल पर संपर्क किया तो उनसे 2 दिन का समय और मांगा गया है। ADC बोलीं- गलत जानकारी देने से हुई परेशानी ADC अंजलि श्रोत्रिया ने बताया कि परिवार पहचान पत्र में दर्ज शुरुआती जानकारी नागरिकों या कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। यहीं पर पवन कुमार द्वारा जो जानकारी दी गई, उसी से परेशानी शुरू हुई थी। अब उनके कागजात लेकर उनकी समस्या को दूर किया जा रहा है। उनका नाम भी जल्द ही ऐड हो जाएगा। इसके बाद वो सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि जब भी किसी प्रकार के करेक्शन के लिए कोई उनके पास आता है तो जरूरी कागजात लेकर संबधित समस्या का हल करते है। पवन कुमार जरूरी दस्तावेज नहीं दे पा रहे थे। इस कारण इसमें समय लग गया। उनके दस्तावेज देने के बाद प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया। ————————————- ये खबर भी पढ़ें…. 53 साल पहले मरे व्यक्ति को जिंदा दिखाकर फर्जीवाड़ा:यमुनानगर में प्रॉपर्टी डीलर ने बनवाई नकली वसीयत, फर्जी आधार-पैनकार्ड, डेथ सर्टिफिकेट बनाया यमुनानगर में करीब 53 साल पहले मृत हो चुके व्यक्ति के नाम पर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर करोड़ों रुपए की जमीन हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि मृतक के नाम पर एक फर्जी व्यक्ति को खड़ा कर वर्ष 2017 में वसीयत भी तैयार करवाई गई। (पूरी खबर पढ़ें)
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पिता को मृत दिखा रोकी बेटी की कन्यादान राशि:फरीदाबाद में सरकारी सिस्टम की लापरवाही; पत्नी को भी विधवा दर्शाया, 6 दिन बाद 31वीं सालगिरह







