सीमा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गुरुवार देर रात स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में आयोजित विमेंस डिस्कस थ्रो फाइनल में भारत की सीमा कालीरमन ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। जमैका की सामंथा हॉल ने गोल्ड जबकि कनाडा की जूलिया टंक्स ने सिल्वर जीता।सीमा कालीरमन ने 58.65 मीट
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बंसीलाल यूनिवर्सिटी की PHD स्कॉलर हरियाणा के भिवानी में दिनोद गांव की रहने वाली 27 साल सीमा न केवल एक बेहतरीन एथलीट हैं, बल्कि भिवानी की चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी भी कर रही हैं। पढ़ाई और खेल के बीच तालमेल बिठाने के साथ-साथ वह मां की भी जिम्मेदारी निभा रही हैं। 2022 में उनके बेटे रुद्र का जन्म हुआ था। 3 साल का बेटा, 2 सीजन रहीं ग्राउंड से बाहर बेटे के जन्म की वजह से सीमा को दो सीजन बाहर बैठना पड़ा था। लेकिन रुद्रे के जन्म के सिर्फ 11 महीने बाद ही सीमा ने कॉम्पिटिटिव ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। अब उनके कोच उनके पति रविंदर हैं। वे खुद भी नेशनल लेवल के डिस्कस थ्रोअर रह चुके हैं। सीमा के लिए वापसी बिल्कुल भी आसान नहीं थी। प्रेग्नेंसी के बाद अपनी ताकत और तकनीक को फिर से हासिल करने की कोशिश में उन्हें अपनी लय वापस पाने के लिए काफी स्ट्रगल करना पड़ा। पति ने निभाई कोच की भूमिका सीमा कालीरमन की सफलता में उनके पति रविंदर का सबसे बड़ा योगदान रहा। रविंदर पहले खुद नेशनल लेवल के डिस्कस थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं। हालांकि चोट के कारण उनका खेल करियर आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को एक सफल खिलाड़ी बनाने का फैसला किया और खुद उनके कोच बन गए। कोरोना महामारी के दौरान रविंदर की सलाह पर ही सीमा ने स्पोर्ट्स साइंस में पीएचडी शुरू की। आज उनकी मेहनत और पति के सहयोग का नतीजा अब आया है।
गोल्ड जीतने के बाद पोडियम पर सीमा कालीरमन।
नेशनल इंटर स्टेट मीट में गोल्ड मेडल सीमा की मेहनत रंग लाई और उन्होंने भुवनेश्वर में हाल ही में हुई नेशनल इंटर-स्टेट मीट में 59.73 मीटर का अपना अब तक का सबसे बेहतरीन थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने पिछले साल कहा था, ‘मैदान पर वापसी करना बहुत मुश्किल था क्योंकि मैं ठीक से डिस्कस भी नहीं फेंक पा रही थी। लेकिन मुझे लगता है कि मेरे पति से मिले मोटिवेशन और उनकी मेंटरिंग ने मुझे अपनी सामान्य ताकत वापस पाने और फिर उसमें और सुधार करने में मदद की।’
