कल अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में सिख मंत्रियों-विधायकों की पेशी के बाद ये साफ हो गया कि सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, वह पंथ को नजरअंदाज नहीं कर सकती। सभी दलों के विधायक एक सामान्य सिख की तरह अकाल तख्त पर पेश हुए। 5 सिंह साहिबानों के आगे जमी
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इस दौरान जत्थेदार के सवालों के आगे बेअदबी कानून को विधायकों की बिना पढ़े मंजूरी से जहां AAP सरकार एक्सपोज हुई। वहीं जत्थेदार ने सरकार को पंजाब में पंथ की अहमियत का भी पाठ पढ़ाया। जत्थेदार ने अकाली दल को भी घेरा तो कांग्रेस खुद को कानून से किनारे करने की कोशिश करते दिखी।
पेशी के दौरान ही मीडिया मैनेजमेंट तक को लेकर जत्थेदार ने सरकार घेर ली। हालांकि आखिर में जत्थेदार ने 6 एतराज जताते हुए कहा कि कानून बनाना और सजा देना सरकार का काम है लेकिन ये एतराज दूर होने चाहिए। इसके लिए एक महीने का टाइम दिया। तब तक कानून होल्ड करने को कहा।
इस मामले के बाद CM भगवंत मान ने पहली बार मंगलवार को धूरी में कहा-
हम अकाल तख्त साहिब को सर्वोच्च मानते हैं। एक महीने का टाइम है। जो भी अकाल तख्त साहिब से हमें कोई सुझाव या संशोधन आएंगे, उन्हें देखेंगे और फिर कैबिनेट में विचार करेंगे।
जानिए, अकाल तख्त में हुई पेशी के असल मायने क्या हैं, इसका आने वाले चुनाव पर क्या असर पड़ेगा, ये सब जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट:-
सिख मंत्रियों-विधायकों की पेशी से पहले अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज(बीच में) समेत 5 सिंह साहिबानों ने अरदास की।
श्री अकाल तख्त में मंत्रियों-MLA की पेशी के 8 मायने:-
1. पंजाब में पंथ सुप्रीम, राजनीति धर्म के की नैतिकता माने श्री अकाल तख्त साहिब में बेअदबी कानून को लेकर सिख एमएलए व मंत्रियों की पेशी के दौरान अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज स्पष्ट मैसेज दे दिया कि पंजाब में सिख पंथ (धर्म) सुप्रीम है। उन्होंने पेशी के समय स्पष्ट कहा कि सिख इतिहास और दर्शन में ‘मीरी-पीरी’ (राजनीति और धर्म) का सिद्धांत सर्वोपरि रहा है, जिसके तहत राजनीति हमेशा धर्म के नैतिकता के दायरे में चलती है।
जत्थेदार गड़गज ने कहा कि आज राजनीति धर्म के पास आई है, जब राजनीति धर्म के साथ चलती है तो इंसाफ होता है। पूरी कैबिनेट व एमएलए का नंगे पैर अकाल तख्त के सामने हाजिर होना यह साबित करता है कि सिख मामलों में आज भी पंजाब की कोई भी चुनी हुई सरकार सर्वोच्च धार्मिक सत्ता श्री अकाल तख्त से ऊपर नहीं है।
2. अकाल तख्त के आगे सियासी ताकत बेअसर पेशी के दौरान जत्थेदार ज्ञानी गड़गज ने नेताओं को श्री अकाल तख्त की पावर दिखाई और साफ कर दिया कि यहां पर जो वो कहेंगे उसके हिसाब से ही प्रोसिडिंग चलेगी। जब सुखपाल खैहरा कह रहे थे तो उसी दौरान आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों व मंत्रियों ने खड़े होकर विरोध करना शुरू किया तो जत्थेदार गड़गज ने दो टूक कह दिया कि यह विधानसभा नहीं है, श्री अकाल तख्त साहिब है।
यहां ये व्यवहार नहीं चलेगा बैठ जाओ। जत्थेदार ने जैसे ही दबका मारा सभी बैठ गए। उन्होंने सुखपाल खैहरा को भी बोलने से रोका। जब खैहरा ने प्रार्थना की तो उसे एक मिनट का समय दिया। टाइम पूरा होते ही खैहरा को भी रोक दिया। यही नहीं जब आप सरकार के मंत्री गुरमीत सिंह खुडि्डयां सरकार के पक्ष में बोलने लगे तो जत्थेदार ने उन्हें भी टोकर बैठा दिया।
3. AAP सरकार एक्सपोज, बिना पढ़े कानून को मंजूरी पेशी के दौरान जत्थेदार ज्ञानी गड़गज ने कानून के संबंध में एक-एक विधायक से सवाल किए। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने कहा कि उन्होंने इस पर सहमति दी थी। लेकिन ज्ञानी गड़गज ने जब पूछा कि उन्होंने कानून पढ़ा था तो ज्यादातर ने कह दिया कि नहीं पढ़ा। विधायक मनजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने कानून पढ़ा है तो जत्थेदार ने उनसे कस्टोडियन की परिभाषा पूछ ली।
जिस पर उन्होंने कहा कि अगर कोई पागल या बच्चा बेअदबी करता है तो उसके माता पिता कस्टोडियन होंगे और उन्हें सजा दी जाएगी। इस पर ज्ञानी गड़गज ने कटाक्ष करते हुए कहा कि शाबाश ऐसे बुद्धिमान सभी होने चाहिए। कई विधायकों का इस तरह कहना कि उन्होंने कानून पढ़ा ही नहीं, सरकार के लिए भारी शर्मिंदगी का कारण बन गया है। विधायकों के इस कबूलनामे से आप सरकार पूरी तरह से एक्सपोज हो गई कि विधायक व मंत्री कानून पास करने से पहले उसे पढ़ते नहीं हैं।
4. पंथ में सरकार का हस्तक्षेप मंजूर नहीं जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने सरकार को आगाह कर दिया कि पंथ से जुड़े मामलों में कोई दखलंदाजी स्वीकार नहीं होगी। पंथ को क्या करना है और क्या नहीं करना है यह सरकार तय नहीं करेगी। जत्थेदार ने कहा कि सिख होने के नाते सुझाव दे सकते हैं, उन्हें मानना या न मानना वो पंथ तय करेगा।
जत्थेदार ने ‘बीड़’ की जगह ‘स्वरूप’ शब्द का इस्तेमाल करने और वेबसाइट पर पवित्र स्वरूपों का रिकॉर्ड डालने के लिए ‘यूनिक नंबर’ जारी करने पर तकनीकी एतराज जताया है। इसका सीधा मायना यह है कि पंजाब विधानसभा या कोई भी सेक्युलर कोर्ट सिख रहित मर्यादा और पंथक शब्दावली को डिक्टेट नहीं कर सकती।
यह अधिकार केवल अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) जैसी पंथक संस्थाओं के पास सुरक्षित है। सरकार केवल गुनहगारों को सजा देने के लिए क्रिमिनल एक्ट बना सकती है, मर्यादा तय करने के लिए नहीं।
5.अकाली दल के रवैये पर सवाल सुनवाई के दौरान ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने बेअदबी कानून का विरोध न करने पर अकाली दल के रवैये पर भी सवाल खड़े किए। ज्ञानी गड़गज ने अकाली विधायक गनीव कौर मजीठिया से सवाल पूछा कि आपने इसका विरोध किया?, तो उन्होंने कह दिया कि विधानसभा के बाहर विरोध किया है।
जब उनसे कहा कि विधानसभा में इस पर क्या कहा तो गनीव कौर ने कहा कि वो हाजिर नहीं थी। जिस पर ज्ञानी गड़गज ने कहा कि आपको वहां जाकर इसका विरोध करना चाहिए था, गए क्यों नहीं? जिस पर गनीव कौर को सफाई देनी पड़ी और उन्होंने कहा कि ये अंदर बोलने नहीं देते हैं और बेइज्जती करते हैं।
6. AAP के मंत्री-विधायक अकाल तख्त के आगे नतमस्तक बेअदबी कानून को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार कहते आ रहे हैं कि हमने बेहतरीन कानून बनाया है और कुछ लोगों को इससे परेशानी है। मुख्यमंत्री कानून के पक्ष में लगातार डटे हुए हैं। उधर, आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री से लेकर विधानसभा स्पीकर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के सामने नतमस्तक दिखे।
मंत्री गुरमीत सिंह खुडि्डयां ने बचाव करते हुए कहा कि कानून बेअदबी रोकने के लिए बनाया गया है। सख्त कानून की मांग थी उसको ध्यान में रखकर सख्त सजा वाला कानून बनाया। अगर इस पर श्री अकाल तख्त साहिब को कोई ऐतराज हैं तो उन्हें दूर कर दिया जाएगा। इस दौरान वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने अकाल तख्त का ही एक आदेश दिखा कानून का बचाव करने की कोशिश की लेकिन जत्थेदार गड़गज ने कहा कि आपने व्याख्या ही गलत की।
इस आदेश में था कि अगर कहीं बेअदबी होती है तो प्रबंधकों पर कार्रवाई हो। जत्थेदार ने कहा कि यह धार्मिक कार्रवाई के लिए है, जो अकाल तख्त करता है। इसमें कहां कानूनी कार्रवाई लिखी, जो आपने कानून बना दिया।
7. कांग्रेस ने खुद को किया बेअदबी कानून से अलग पेशी के दौरान जब जत्थेदार ज्ञानी गड़गज ने कांग्रेस के विधायक व एलओपी से बेअदबी कानून के बारे में पूछा तो वो पूरी तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने विधानसभा की अपनी पूरी स्पीच पढ़नी शुरू की और सरकार को घेर लिया। उन्होंने कहा कि सरकार को सुझाव दिया था कि श्री अकाल तख्त साहिब से इस पर सुझाव लिए जाएं, लेकिन इन्होंने नहीं मानी।
यही बात सुखपाल खैहरा व परगट सिंह ने कही। कांग्रेस ने बेअदबी कानून विवाद से खुद को अलग किया और सरकार को घेरा। वहीं नेहरू-मास्टर तारा सिंह समझौते का उल्लेख भी पेशी के दौरान हुआ जिसमें यह तय हुआ था कि बिना एसजीपीसी की सलाह के धार्मिक कानून नहीं बनाया जाएगा। इससे भी कांग्रेस को फायदा मिला और वो अब कहते नजर आ रहे हैं कि नेहरू ने सिख पंथ को सर्वोपरि मानते हुए यह समझौता किया था।
8. मीडिया मैनेजमेंट पर खुलेआम घिर गई सरकार जब पेशी शुरू हुई तो आप विधायक इंदरबीर सिंह निज्जर ने अकाल तख्त के सामने लाइव प्रसारण न करने का अनुरोध किया। जिस पर अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गड़गज ने कह दिया कि तुम्हारे मुख्यमंत्री ने कहा था कि लाइव करो, सबके पोथड़े खोल दूंगा। जिसने जो पोथड़े खोलने हैं कैमरों के सामने लाइव खोले।
पेशी के दौरान टीवी चैनलों पर अचानक पेशी का लाइव प्रसारण बंद हो गया। जत्थेदार ज्ञानी गड़गज को पता चला तो उन्होंने बीच में ही कह दिया कि सरकार का एक मंत्री अपनी मीडिया टीम से बात करे कि टीवी पर लाइव प्रसारण क्यों बंद करवाया, इसे चलने दो।
उसके बाद उन्होंने कुलतार सिंह संधवा का नाम लेकर कहा कि जल्दी फोन करके चैनलों पर इसका सीधा प्रसारण शुरू करवाओ। वहीं शिअद, कांग्रेस व भाजपा ने लाइव प्रसारण बंद होने पर सरकार को घेर लिया और आरोप लगाए कि सरकार मीडिया को मैनेज करती है।
एक्सपर्ट से जानिए, पेशी के आगे क्या और इसका क्या असर:-
सरकार अकाल तख्त की बात को मानने के लिए बाध्य नहीं धार्मिक मामलों के जानकार व पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के धार्मिक डिपार्टमेंट के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. हरपाल सिंह पन्नू का कहना है कि श्री अकाल तख्त धार्मिक सर्वोच्च संस्था है। हर सिख उसके आदेशों का पालन करता है। नियम और कानून बनाने का काम सरकार का है। सरकार को धार्मिक मामलों के कानून बनाते समय धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों से विचार विमर्श जरूर करना चाहिए ताकि टकराव की स्थिति न हो।
सरकार 3 तरह के फैसले ले सकती है, इसका सियासी असर जानिए… पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप सिंह का कहना है कि अकाल तख्त ने सरकार को कानून में संशोधन के लिए 1 महीने का टाइम दिया है। इसमें सरकार की तरफ से 3 तरीके से अमल किया जा सकता है…
पहला… अगर सरकार अकाल तख्त के दिए एतराजों को सीधे खारिज करती है तो इससे AAP को 2027 के चुनाव में नुकसान हो सकता है। AAP से सिख वोट बैंक छिटका तो इसका फायदा अकाली दल, अकाली दल वारिस पंजाब दे जैसे दलों को हो सकता है।
दूसरा..अगर सरकार सभी एतराज को मानकर कानून में पूरी तरह से संशोधन कर देती है तो इससे सीधे आम सिखों में मैसेज जाएगा कि वाकई सरकार ने कानून को सही ढंग से नहीं बनाया, ऐसे में AAP चुनाव में यहां फंस सकती है कि उन्होंने कानून को मनमाने ढंग से बनाया। हालांकि जिस तरह से CM भगवंत मान लगातार कानून की पैरवी कर रहे हैं, उससे सारे एतराज मानने के चांस नहीं लगते।
तीसरा… यह बीच का रास्ता हो सकता है। अकाल तख्त की तरफ सबसे ज्यादा एतराज कस्टोडियन की परिभाषा को लेकर है कि उसमें गुरुद्वारों के प्रबंधकों पर कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था कर दी गई। सरकार इसमें कोई ढील बरतकर कानून में जरूर संशोधन कर सकती है। इससे अकाल तख्त का प्रमुख एतराज दूर हो जाएगा और सरकार को कानून को पूरी तरह से संशोधन भी नहीं करना पड़ेगा। लोगों के बीच भी कानून को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहेगी कि कौन सही था और कौन गलत..।
अकाल तख्त के बारे में जानिए:-
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अकाल तख्त का आदेश- 1 महीने में बेअदबी कानून संशोधित करो, जत्थेदार ने CM मान के 2 वीडियो दिखाए
श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को बेअदबी कानून जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 में एक महीने में संशोधन करने का आदेश दिया है। सोमवार (29 जून) को हुई सुनवाई के दौरान अकाल तख्त जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कानून पर 6 एतराज जताए।
उन्होंने कहा कि सरकार बेअदबी करने वालों को सजा देने के लिए कानून बनाए, इस पर कोई एतराज नहीं है, लेकिन सिख शब्दावली, मर्यादा और पंथ से जुड़े मामलों में विधानसभा फैसला नहीं कर सकती। तब तक इस कानून को होल्ड किया जाए। जत्थेदार ने 2 सवाल पूछे। इस दौरान विधायकों ने माना कि कानून को बिना पढ़े सहमति दी। सुनवाई से पहले जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो वीडियो भी सुनवाए (पढ़ें पूरी खबर)
