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Portal Monitoring, 12 Depts Responsible by 2030


केंद्र सरकार के फैसले के बाद अब हरियाणा में भी बाल विवाह को लेकर डेड लाइन फिक्स कर दी गई है। साल 2030 तक बाल विवाह पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए सरकार मॉनिटरिंग शुरू करेगी। इसके लिए हरियाणा महिला व बाल विकास विभाग जल्द ही एक पोर्टल तैयार करेगा, इसम

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मुख्यालय स्तर पर पोर्टल के माध्यम से सीधे मॉनिटरिंग की जाएगी। प्रदेश में बाल विवाह को रोकने के लिए पुलिस, बाल विवाह निषेध अधिकारियों, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग सहित 12 विभागों की जिम्मेदारी होती है।

विभागीय अधिकारी समीक्षा करेंगे कि कहां और किस स्तर पर समाधान को लेकर परेशानी आ रही है। यदि समस्याएं निस्तारित नहीं हो रहीं या बाल विवाह जैसे मामलों में रोक नहीं लग पा रही, इसकी जबाबदेही भी तय होगी। विभाग की निदेशक प्रियंका सोनी ने बताया कि विशेष पोर्टल संचालित किया जाएंगे, उसमें बाल विवाह सहित घरेलू हिंसा और अन्य दूसरी कई विभागीय योजनाओं की निगरानी होगी।

प्रतीकात्मक फोटो।

प्रतीकात्मक फोटो।

ये फैसला लेने की 4 वजह

​सैनी सरकार का ‘नो टॉलरेंस’ मोड: प्रदेश के 12 विभागों को एक साथ जोड़ दिया गया है। अब पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की सीधी जवाबदेही होगी। अगर कहीं भी बाल विवाह हुआ, तो गाज सीधे जिम्मेदार अधिकारी पर गिरेगी।

​शादी के ‘पार्टनर्स’ पर शिकंजा: अब सिर्फ घर वाले नहीं, बल्कि शादी में शामिल पंडित, बैंड-बाजा वाले, टेंट वाले और मैरिज पैलेस संचालक भी रडार पर होंगे। उन्हें हर संदिग्ध शादी की सूचना पोर्टल पर देनी होगी। जानकारी छिपाई तो ‘कानूनी कार्रवाई’ पक्की।

​2030 का मिशन ‘क्लीन हरियाणा’: सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2030 तक राज्य से बाल विवाह का कलंक पूरी तरह मिटा देना है। पिछले 5 साल में 1729 मामले सामने आना एक बड़ी चुनौती है, जिसे तोड़ने के लिए यह पोर्टल बनाया गया है।

​मुख्यालय से होगी ‘लाइव’ निगरानी: निदेशक प्रियंका सोनी के अनुसार, अब पोर्टल की मॉनिटरिंग सीधे हेडक्वार्टर से होगी। यानी लोकल लेवल पर कोई भी फाइल अब दब नहीं पाएगी।

5 वर्ष में बाल विवाह के 1,729 मामले आए सामने

केंद्र सरकार ने 2030 तक बाल विवाह पर पूरी तरह से रोक लगाने का लक्ष्य तय किया है। हरियाणा में भी सख्ती शुरू हो गई है। राज्य में विवा कराने से जुड़े मैरिज पैलेस संचालकों, बैंड, टेंट संचालकों से लेकर सामाजिक संगठनों, पंचायतों से सहयोग मांगा गया है। धार्मिक संगठनों जैसे मंदिर की प्रबंधन कमेटी, शादी कराने वाले पंडित आदि को भी बाल विवाह कराने वालों की सूचना देने के लिए कहा गया है।

विभाग ने भी सहयोग मांगा है। हरियाणा की बात करें, तो वर्ष 2021-2022 से 2025-2026 तक 1729 शिकायतें सामने आ चुकी हैं।



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