नगरासू में गुरुद्वारा साहिब पर कब्जा करके खड़े निहंग सिंह और बाहर तैनात सुरक्षाबल।
उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारा साहिब पर पंजाब के निहंगों का कब्जा तीसरे दिन भी बना हुआ है। निहंग हथियार व ईंट पत्थर लेकर गुरुद्वारा साहिब की चौथी मंजिल में बैठे हैं। जिला प्रशासन की निहंगों से लगातार बात चल रही है, लेकिन निहंग अभ
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निहंग सिंहों ने पहले ऋषिकेश के गुरुद्वारा साहिब में सेवादारों से मारपीट की। मामला थाने में पहुंचा तो निहंग थाने से निकलकर आ गए। निहंगों ने कबूल किया है कि वे श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर नहीं आए थे, बल्कि वे कर्णप्रयाग कांड को लेकर यहां आए थे।
निहंग जगदीप सिंह अकाली ने एक मीडिया हाउस के साथ बात करते हुए दावा किया है कि नगरासू के गुरुद्वारा साहिब प्रबंधक गुरु मर्यादाओं का पालन नहीं कर रहे हैं। वे अंडरवियर में खुले सिर घूमते हैं। इसकी वजह से यहां हाथापाई हुई। संचालक बेअंत सिंह ने पुलिस व फौज बुलाई, इसलिए उन्होंने चौथी मंजिल पर किला बना दिया है।
वहीं, संचालक का कहना है कि ये गुरुद्वारे पर कब्जे के लिए ही आए थे। हाथापाई के दौरान इन्होंने यह बात कही थी। उधर, रुद्रप्रयाग के जिला अधिकारी (DM) विशाल मिश्रा का कहना है कि नगरासू में स्थिति सामान्य है और यात्रा सुचारू रूप से चल रही है। निहंगों के साथ बातचीत की गई है। कोई भी किसी तरह की अफवाहों में न आए।

निहंग जगदीप सिंह अकाली ने कहीं ये अहम बातें…
- ऋषिकेश में सेवादार कर रहे मर्यादा भंग: निहंग ने कहा कि जब वे ऋषिकेश गुरुद्वारा साहिब में पहुंचे तो वहां सेवादार मर्यादा का उल्लंघन कर रहे थे, जो उनसे नहीं सहा गया। उनका कहना है कि सेवादार वहां अंडरवियर में घूम रहे थे और उनके सिर नंगे थे। हमारे एक निहंग सिंह ने उसे ऐसा करने से मना किया तो उसने गालियां देनी शुरू कीं। इस पर निहंग ने उसे पीट दिया। जब और निहंगों ने भी उसे पीटना शुरू किया तो मैं खुद भी बीच में आया। मैंने भी उसे दो लगाई और बाकी को चुप कराया।
- ऋषिकेश थाने से उठकर आए: निहंग सिंह ने कहा कि जब ऋषिकेश गुरुद्वारा साहिब में पंगा हुआ तो उन्होंने पुलिस बुला दी। फिर वे थाने गए। थाने में बहस हुई और वे वहां से उठकर आ गए। उनका कहना है कि निहंगों को न कोई पकड़ सकता है और न ही कोई रोक सकता है।
- रास्ते में कर रहे सिखों को परेशान: निहंग सिंह का कहना है कि यात्रा मार्ग पर सिख श्रद्धालुओं को तंग किया जा रहा है। कर्णप्रयाग की घटना के बाद लोगों को परेशान किया जा रहा है। इसीलिए वे यहां आए थे।
- नगरासू में आए तो वहां भी मर्यादा भंग हो रही: निहंग ने कहा कि नगरासू गुरुद्वारा साहिब में आए तो वहां पर भी मर्यादा भंग हो रही है। उनका कहना है कि उनके निहंग सिंह ने लंगर में मर्यादा भंग होने की बात प्रबंधक से की तो उसने गालियां देनी शुरू कर दीं। उसके बाद निहंगों ने उसकी पिटाई की।
- प्रबंधक ने पुलिस बुलाई: निहंग का कहना है कि प्रबंधक ने ऋषिकेश का वीडियो पुलिस को भेजा और कहा कि हम उनके गुरुद्वारा साहिब में हैं। उसके बाद वहां पुलिस व फौज आ गई। उनको देखकर लगा कि अगर अब बाहर गए तो लड़ाई हो जाएगी। हमारे निहंग बहुत गर्म स्वभाव के हैं। वे 100-150 बंदों को अकेले झेलने की ताकत रखते हैं। इसलिए, हम चौथी मंजिल पर चले गए।

निहंग जगदीप सिंह अकाली ने कब्जाधारी निहंगों की बात रखी।
गुरुद्वारा संचालक बेअंत सिंह ने ये बातें बताईं…
- लंगर को लेकर हुआ विवाद: नगरासू स्थित गुरुद्वारा संचालक बेअंत सिंह ने कहा कि पहले 3 लोग आए और फिर कुछ लोग बाद में आए। इन्होंने लंगर में आकर संगत के साथ लड़ाई शुरू की। सेवादार को पीटा और गालियां देनी शुरू की। बेअंत सिंह का कहना है कि एक व्यक्ति नीले बाणे में नहीं था, उसने ज्यादा धमकियां दी और कहा कि हम गुरुद्वारा साहिब पर कब्जा करने आए हैं। यहां से नहीं जाएंगे।
- रास्ते में लड़ते हुए आए निहंग: गुरुद्वारा संचालक का कहना है कि इन लोगों ने पहले ऋषिकेश में गुरुद्वारा साहिब में लड़ाई की। फिर पुलिस के साथ झगड़ा किया। रास्ते में आते हुए धारी देवी के पास लंगर वालों से भी लड़ाई की। रास्ते में देसी घी के लंगर वालों को गाली दी और बाइक दुर्घटना में मारे गए एक लड़के के परिजनों से भी झगड़ा किया था।
- गुरुद्वारा साहिब में की तोड़फोड़: बेअंत सिंह का कहना है कि गुरुद्वारा प्रबंधन ने उनके मुख्य व्यक्ति को सिरोपा देकर शांति से चले जाने को कहा था, लेकिन वे बाहर निकलकर गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर चढ़ गए। नीचे का रास्ता बंद कर दिया और लाखों रुपए का नुकसान किया। उन्होंने गुरुद्वारे का सोलर सिस्टम और पानी का पूरा सिस्टम तोड़ दिया।
- हमारे लोगों को बंधक बनाया: बेअंत सिंह ने कहा कि निहंगों ने उनके लोगों को बंधक बनाया। पुलिस के कहने पर भी उन्होंने सेवादारों को नहीं छोड़ा। वे यहां गुरुद्वारा साहिब पर कब्जा करने आए हैं। उनकी वजह से गुरुद्वारा साहिब का प्रबंधन पूरी तरह से हिल गया है।

नगरासू स्थित गुरुद्वारा संचालक बेअंत सिंह ने निहंगों के गुरुद्वारे में घुसने की बात बताई।
सिलसिलेवार ढंग से पूरा मामला जानिए…
- 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में विवाद की शुरुआत: हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे 5-6 निहंग बाइक सवारों के एक जत्थे की बाइक कर्णप्रयाग मुख्य बाजार में खड़ी एक कार से टकरा गई। इसके बाद कार मालिक और बाइक सवार के बीच कहासुनी शुरू हो गई। यह बहस देखते ही देखते हिंसक मारपीट में बदल गई। आरोप है कि कुछ निहंगों ने तलवारों और धारदार हथियारों से स्थानीय लोगों पर हमला कर दिया, जिसमें 3 से 4 लोग घायल हो गए। इनमें एक स्थानीय होटल कारोबारी की हालत नाजुक होने पर उन्हें एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश भेजा गया।
- गुस्साए लोगों ने जाम लगाकर प्रदर्शन किया: घटना के विरोध में स्थानीय व्यापारियों और जनता ने बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर करीब 5 घंटे लंबा जाम लगा दिया, जिससे गौचर से नंदप्रयाग तक 25 किलोमीटर क्षेत्र में वाहनों की कतारें लग गईं और चारधाम यात्रा प्रभावित हुई थी। तब चमोली के DM गौरव कुमार और SP सुरजीत सिंह पवार ने समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से 3 को पुरसाड़ी जेल भेज दिया गया है।

निहंगों ने कर्णप्रयाग मुख्य बाजार में तलवारें चलाई थीं। – फाइल फोटो
- 20 जून को रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में हंगामा: कर्णप्रयाग की घटना से नाराज होकर 4 दिनों से रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में ठहरे 7 निहंगों ने वहां हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने गुरुद्वारे के सेवादार व एक बाबा से मारपीट की और वहां ठहरे एक अन्य यात्री को कथित रूप से बंधक बना लिया।
- स्थानीयों पर कार्रवाई न होने से नाराज: निहंगों की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि कर्णप्रयाग मामले में स्थानीय लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई और स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन ने इस पर कोई आपत्ति या औपचारिक शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई। विवाद बढ़ने पर निहंग अपने पारंपरिक शस्त्रों (भाले और पत्थर) के साथ गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और खुद को अंदर बंद कर लिया। उन्होंने छत से कुछ पत्थर नीचे भी फेंके, जिससे आसपास के बाजार में दहशत फैल गई।
- सुरक्षा बलों का पहरा और ITBP की तैनाती: घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल, PAC के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों को बुलाया गया। ITBP और स्थानीय पुलिस ने गुरुद्वारे को चारों तरफ से घेर लिया।

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