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- Haryana Lecturers Regularization: HC Orders Decision In 6 Months, Warns Officers Of ₹50K Fine
चंडीगढ़50 मिनट पहले
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जनवरी 2026 की RTI रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 185 सरकारी कॉलेजों में 1,971 एक्सटेंशन लेक्चरर और 45 गेस्ट लेक्चरर कार्यरत हैं।
हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में वर्षों से कार्यरत अनुबंधित लेक्चररों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि कंप्यूटर साइंस, कॉमर्स और मैनेजमेंट विषयों के अनुबंधित लेक्चररों के नियमितीकरण से जुड़े लंबित मामलों पर 6 महीने के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय तक नियमितीकरण के मुद्दे पर अनिश्चितता में नहीं रखा जा सकता। यदि निर्धारित समय सीमा में फैसला नहीं लिया गया तो संबंधित अधिकारियों पर 50 हजार रुपए तक का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया जा सकता है।
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट प्रतीकात्मक फोटो।
क्या है पूरा मामला? हरियाणा के विभिन्न सरकारी कॉलेजों में कंप्यूटर साइंस, कॉमर्स और मैनेजमेंट विषयों के कई लेक्चरर वर्षों से अनुबंध के आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। इन लेक्चररों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे लंबे समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके नियमितीकरण पर सरकार कोई अंतिम निर्णय नहीं ले रही। इससे उनके भविष्य, नौकरी की सुरक्षा और सेवा लाभों को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ है। हाईकोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि नियमितीकरण के मामलों को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। पात्र कर्मचारियों के दावों पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लेना सरकार की जिम्मेदारी है। लंबे समय तक निर्णय नहीं लेने से कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि सभी लंबित दावों और अभ्यावेदनों की जांच कर 6 महीने के भीतर कारण सहित फैसला सुनाया जाए। अफसरों को चेतावनी हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय में आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में उन पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालत का यह रुख प्रशासनिक देरी पर सख्त संदेश माना जा रहा है।
सरकार के सामने अब क्या चुनौती?
अब उच्च शिक्षा विभाग को सभी पात्र लेक्चररों के रिकॉर्ड की समीक्षा करनी होगी।नियमितीकरण नीति और नियमों के तहत दावों की जांच करनी होगी। छह महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा। कोर्ट को आदेश अनुपालन की जानकारी भी देनी पड़ सकती है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनुबंधित लेक्चररों में खुशी का माहौल है। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित मुद्दे पर पहली बार अदालत ने स्पष्ट समय सीमा तय की है। इससे नियमितीकरण प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
