चंडीगढ़ नगर निगम हाउस की बैठक (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद अवैध वेंडरों को राहत देने के आरोपों के बीच चंडीगढ़ नगर निगम अब ग्रीवांस रिड्रेसल एंड डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी (GRDRC/GRD सेल) को खत्म करने की तैयारी में है। निगम सदन ने 31 जुलाई की बैठक में सर्वसम्मति से सेल को भंग
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निगम प्रशासन का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जीआरडी सेल की ओर से ऐसे वेंडरों को भी स्टे दिया जा रहा है, जिनके खिलाफ निगम की ओर से कार्रवाई की गई है। यही नहीं, कार्रवाई करने वाले निगम अधिकारियों को ही सेल के सामने तलब किए जाने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध वेंडरों पर कार्रवाई के दिए हैं निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने वेंडिंग व्यवस्था को लेकर अपने आदेशों में अवैध वेंडरों को शहर से हटाने और नॉन-एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर वेंडरों को निर्धारित वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, GRDRC और अपीलेट अथॉरिटी को किसी वेंडर को नया स्टे नहीं देने और पुराने मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए कहा गया है। वहीं, केवल एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर वेंडरों को पहले से निर्धारित स्थानों पर रहने की अनुमति है।

स्टे देने और अफसरों को तलब करने पर बढ़ा विवाद
निगम अधिकारियों के अनुसार, जीआरडी सेल की कार्यप्रणाली को लेकर सबसे ज्यादा विवाद उस समय बढ़ा, जब सेल ने एनफोर्समेंट विंग के उन इंस्पेक्टरों को तलब कर लिया, जिन्होंने अवैध वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
अधिकारियों से यह पूछा गया कि वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई। निगम प्रशासन में इसे लेकर नाराजगी है। अधिकारियों का तर्क है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अवैध वेंडरों पर कार्रवाई की जा रही है, तो कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को ही जवाब देने के लिए बुलाना उचित नहीं है।
30 दिन की समय सीमा भी बीती, फिर 15 दिन का विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नॉन-एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर वेंडरों को निर्धारित वेंडिंग जोन में शिफ्ट होने के लिए पहले 30 दिन का समय दिया गया था। बाद में इस अवधि को 15 दिन और बढ़ाया गया।
इसके बावजूद समय सीमा समाप्त होने के बाद भी बड़ी संख्या में वेंडर पुराने स्थानों पर ही कारोबार कर रहे हैं। निगम का कहना है कि ऐसे मामलों में कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
31 जुलाई को सदन ने सर्वसम्मति से लिया फैसला
जीआरडी सेल को लेकर नगर निगम सदन में भी चर्चा हुई। 31 जुलाई की बैठक में पार्षदों ने सर्वसम्मति से सेल को भंग करने का प्रस्ताव पास किया।
अब इसी प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट को सिफारिश भेजी जाएगी। निगम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में सेल की ओर से ऐसे फैसले न लिए जाएं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत माना जा रहा है।
मेयर बोले- सदन का फैसला उच्च अधिकारियों को भेज रहे
चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि नगर निगम सदन ने सर्वसम्मति से जीआरडी सेल को भंग करने का निर्णय लिया था। अब सदन के मत और सिफारिश को संबंधित उच्च अधिकारियों के पास भेजा जा रहा है, ताकि आगे जीआरडी सेल को कार्य विस्तार न दिया जाए।







