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पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार मंगवाकर गुरुग्राम में वारदात को अंजाम देने जा रहे युवकों को चंडीगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस की अब तक की जांच में इस मामले की जो तस्वीर सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। पुलिस के मुताबिक, हथियारों की सप्लाई करने वाला अमृतसर का व्यक्ति गांव में सामान्य और अच्छी छवि वाला था। उसके खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं था। वह घर पर दूध की डेयरी चलाता था, लेकिन कथित तौर पर पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार मंगवाने के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। पुलिस के अनुसार, अमृतसर का आरोपी बाहर से देखने पर आम ग्रामीण की तरह ही जिंदगी जी रहा था। वह अपने घर में दूध की डेयरी चलाता था और गांव में उसकी छवि भी अच्छी थी। पुलिस का दावा है कि इसी सामान्य छवि की आड़ में वह हथियारों की सप्लाई के लिए काम कर रहा था। आरोप है कि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार उसके खेतों में पहुंचाए जाते थे। इसके बाद इन हथियारों को आगे जरूरत के मुताबिक सप्लाई किया जाता था। विदेश में बैठे हैंडलर से सोशल मीडिया के जरिए जुड़े युवक मामले में पकड़े गए युवक हरियाणा के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, इनकी उम्र महज 17-18 साल है। ये कोई पुराने या शातिर अपराधी नहीं हैं, बल्कि छोटी-मोटी दुकानों पर काम करने वाले युवक बताए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि इन युवकों की विदेश में बैठे एक हैंडलर से सोशल मीडिया के जरिए पहचान हुई। इसके बाद उन्हें मोटी रकम का लालच दिया गया और धीरे-धीरे कथित हथियार नेटवर्क का हिस्सा बना लिया गया। गुरुग्राम में वारदात से पहले पकड़े गए पुलिस के अनुसार, आरोपी पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए मंगवाए गए हथियार लेकर गुरुग्राम में किसी वारदात को अंजाम देने के लिए जा रहे थे। इससे पहले ही चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें काबू कर लिया।जांच में अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि युवकों को हथियार किसने उपलब्ध करवाए, विदेश में बैठे हैंडलर की भूमिका क्या थी और गुरुग्राम में किस वारदात को अंजाम देने की तैयारी थी। छोटी उम्र, बड़ा लालच और सोशल मीडिया का जाल इस मामले में सबसे गंभीर पहलू आरोपियों की उम्र है। पुलिस के मुताबिक, 17-18 साल के ये युवक किसी बड़े आपराधिक रिकॉर्ड वाले गिरोह का हिस्सा नहीं थे। छोटी दुकानों पर काम करने वाले इन युवकों को कथित तौर पर मोटी रकम का लालच देकर अपराध की दुनिया में धकेला गया। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सोशल मीडिया के जरिए युवकों तक कौन पहुंचा और पाकिस्तान से हथियार मंगवाने से लेकर उन्हें आगे पहुंचाने तक नेटवर्क कैसे काम कर रहा था। जिगाना पिस्टल जांच के घेरे में पुलिस की तरफ से आरोपियों से जिगाना पिस्टल बरामद की गई है। यह उसी तरह की पिस्टल है, जिसका इस्तेमाल सेक्टर-11 में श्री कुमार मेडिकल स्टोर पर कैशियर जानकीदास की हत्या में किया गया था, लेकिन पुलिस अभी तक उस जिगाना पिस्टल को बरामद नहीं कर पाई है। इससे पहले भी इस पिस्तौल का इस्तेमाल पंजाब में सिद्धू मूसेवाला की हत्या में किया गया था। यह भी पुलिस के लिए रहस्य बनी हुई है। अब घटना से पहले चंडीगढ़ पुलिस को वारदात से पहले ही बरामद कर लिया है, तो वह पिस्टल कहां से आती है और कैसे घटना के बाद वापस चली जाती है?
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