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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में मौसम के बदलते मिजाज ने ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी नैरोगेज रेल सेवा के पहियों पर एक बार फिर ब्रेक लगा दिया है। अभी बीती 31 जुलाई को ही करीब 10 दिनों की कड़ी मशक्कत और मरम्मत के बाद इस ऐतिहासिक रेलमार्ग को ट्रेनों की आवाजाही के लिए सुरक्षित घोषित कर हरी झंडी दिखाई गई थी। लेकिन महज 12 दिनों के भीतर पहाड़ों में हुई मूसलाधार बारिश और तलाड़ा रेलवे स्टेशन के पास पटरियों के समीप भीषण लैंडस्लाइड के कारण उत्तर रेलवे जम्मू मंडल को फिर से कड़ा फैसला लेना पड़ा है। उत्तर रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए 12 अगस्त से अगले आदेशों तक पठानकोट-बैजनाथ पपरोला खंड की 4 प्रमुख ट्रेनों (अप-डाउन) को अग्रिम आदेशों तक पूरी तरह रद्द कर दिया है। हालांकि, बैजनाथ पपरोला-जोगिंदर नगर और बैजनाथ पपरोला-कोपरलाहड़ के बीच चलने वाली 4 ट्रेनों का संचालन जारी रखा जाएगा। आज से रद्द की गई ट्रेनें
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा के लिहाज से निम्नलिखित 4 ट्रेनों का संचालन पूरी तरह ठप रहेगा: राहत: इन सुरक्षित खंडों पर चलती रहेंगी 4 ट्रेनें
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कम प्रभावित और सुरक्षित रूटों पर 4 ट्रेनों का संचालन सुचारू रखा है: 31 जुलाई को 10 दिन बाद बहाल हुई थी सेवा, अब फिर छाया संकट गौरतलब है कि इससे पहले 21 जुलाई को भारी बारिश और मलबे के कारण यह रेलमार्ग बंद कर दिया गया था। रेलवे की इंजीनियरिंग टीमों ने दिन-रात मेहनत कर ट्रैक को दुरुस्त किया था और 31 जुलाई की सुबह 5 बजे पहली ट्रेन पठानकोट से जोगिंदर नगर के लिए रवाना की गई थी। शुरुआती चरण में 2 जोड़ी ट्रेनें चलाकर नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से बहाल करने की योजना थी। लेकिन अगस्त के दूसरे हफ्ते में दोबारा हुई मूसलाधार बारिश ने रेलवे के दावों और ट्रैक की स्थिति पर फिर से पानी फेर दिया। यात्रियों पर दोहरी मार: ट्रेन बंद होने से 5 गुना महंगा पड़ा बस का सफर कांगड़ा घाटी रेल सेवा इस क्षेत्र की लाइफलाइन होने के साथ-साथ परिवहन का सबसे सस्ता जरिया है। जेब पर भारी बोझ: ट्रेनें बार-बार बंद होने से रोजाना दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूली छात्रों और स्थानीय दुकानदारों को निजी गाड़ियों या बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। बसों का किराया रेल किराए की तुलना में लगभग 5 गुना (5X) अधिक है, जिससे आम जनता का बजट बिगड़ गया है। सड़क मार्ग पर जाम: पटरियों पर ट्रेन न दौड़ने के कारण सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है, जिससे घंटों लंबे ट्रैफिक जाम का सामना भी करना पड़ रहा है। व्यापार व पर्यटन प्रभावित: कांगड़ा घाटी के पर्यटन उद्योग की रीढ़ मानी जाने वाली इस नैरोगेज ट्रेन के ठप होने से स्थानीय होटलों और दुकानदारों की रौनक भी गायब हो गई है। युद्ध स्तर पर ट्रैक की मरम्मत जारी रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तलाड़ा स्टेशन के पास पटरियों पर गिरे मलबे को हटाने और धंसी हुई मिट्टी की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। स्थिति सामान्य होने और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही रद्द ट्रेनों को दोबारा पटरी पर उतारा जाएगा।
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